रायपुर, 17 मार्च 2026। प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना (PMMVY) के प्रभावी क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ देश में पहले स्थान पर रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने योजना को तेजी से लागू करते हुए लाभार्थियों तक समय पर पहुंचाया है। इस उपलब्धि के साथ छत्तीसगढ़ ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है।
जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि इस योजना के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता देकर सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने इसे राज्य के निरंतर प्रयासों और प्रशासनिक सक्रियता का परिणाम बताया।
रिकॉर्ड पंजीयन और तेजी से स्वीकृति
योजना के तहत लाभार्थियों के पंजीयन और स्वीकृति में लगातार सुधार हुआ है:
- 2023-24: 1,75,797 पंजीयन
- 2024-25: 2,19,012 पंजीयन
- 2025-26 (फरवरी तक): 2,04,138 पंजीयन (93.3% लक्ष्य)
आवेदनों के 83% का परीक्षण कर भुगतान के लिए भेजा गया, जबकि केंद्र से 83.87% स्वीकृति दर हासिल हुई, जो देश में सबसे अधिक है।
शिकायतों के निपटान में भी अव्वल
लाभार्थियों की अधिकतर शिकायतें भुगतान से जुड़ी थीं, जिनका त्वरित समाधान किया गया। राज्य में 93% शिकायतों का निराकरण किया गया, जिससे छत्तीसगढ़ इस मामले में भी पहले स्थान पर रहा।
तीन साल में 5.98 लाख महिलाओं को लाभ
पिछले तीन वर्षों में राज्य में
- 5,98,947 गर्भवती महिलाओं का पंजीयन
- 5,40,624 को स्वीकृति दी गई
योजना के तहत मिलती है आर्थिक सहायता
इस योजना के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं को:
- पहली संतान पर 5,000 रुपये
- दूसरी बेटी के जन्म पर 6,000 रुपये
तीन किस्तों में दिए जाते हैं:
- पंजीयन पर ₹1,000
- 6 माह बाद ₹2,000
- जन्म, पंजीकरण और टीकाकरण के बाद ₹2,000
इस योजना का उद्देश्य संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना और शिशु मृत्यु दर को कम करना है।

