बिलासपुर। यूजीसी समता के संवर्धन अधिनियम 2026 के विरोध में सर्व सवर्ण समाज, बिलासपुर के बैनर तले सोमवार को शहर में एक बड़ी रैली निकाली गई। इस रैली में ब्राह्मण समाज के विभिन्न वर्गों—कान्यकुब्ज ब्राह्मण, छत्तीसगढ़ी ब्राह्मण, सरजू पारी ब्राह्मण—के साथ-साथ अग्रवाल समाज, सिंघी समाज, गुजराती समाज, क्षत्रिय समाज, महाराष्ट्रीयन समाज, जैन समाज और कायस्थ समाज के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए। रैली में विशेष रूप से महिला शक्ति की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली।
रैली देवकीनंदन चौक से प्रारंभ होकर कलेक्टर कार्यालय तक पहुंची, जहां समाज के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर यूजीसी समता के संवर्धन अधिनियम 2026 के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। समाज का कहना है कि यह अधिनियम सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के साथ भेदभाव करता है और उच्च शिक्षा में उनके अधिकारों को प्रभावित करता है।
ज्ञापन के माध्यम से सर्व सवर्ण समाज ने अधिनियम को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की है। समाज ने कहा कि उच्च शिक्षा में सभी विद्यार्थियों को समान अवसर मिलना चाहिए और किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि यह अधिनियम उच्च शिक्षा व्यवस्था में असमानता को बढ़ावा देगा।
सर्व सवर्ण समाज ने उच्च शिक्षा की मौजूदा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। समाज का कहना है कि इस अधिनियम के लागू होने से सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों की प्रतिस्पर्धा और भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिससे उनके शिक्षा के अधिकार का हनन होगा।
समाज के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया और अधिनियम को वापस नहीं लिया गया, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। साथ ही, सभी वर्गों से एकजुट होकर इस अधिनियम के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने की अपील की गई है।
सर्व सवर्ण समाज का यह विरोध प्रदर्शन यूजीसी समता के संवर्धन अधिनियम 2026 के खिलाफ बढ़ते असंतोष को दर्शाता है। समाज का कहना है कि वे उच्च शिक्षा में समानता और न्याय की मांग को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास करते रहेंगे।

