रायपुर, 13 मार्च 2026। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि भारतीय संस्कृति में धरती को मां का दर्जा दिया गया है, इसलिए पर्यावरण और प्रकृति संरक्षण हमारी परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि संसाधनों का उपयोग करते समय धरती और पर्यावरण के स्वास्थ्य का ध्यान रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री साय राजधानी रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित द्वितीय छत्तीसगढ़ हरित शिखर सम्मेलन (Chhattisgarh Green Summit) को संबोधित कर रहे थे।
ग्रीन इकोनॉमी के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश की अर्थव्यवस्था का पावर इंजन है और अब राज्य ग्रीन इकोनॉमी के क्षेत्र में भी अपनी भूमिका लगातार मजबूत कर रहा है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के सम्मेलन इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनके माध्यम से पॉलिसी मेकर्स, उद्योग जगत, शैक्षणिक संस्थान, शोधकर्ता और पर्यावरणविद एक मंच पर आकर पर्यावरण संरक्षण के मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हैं।
जलवायु संकट से निपटने के लिए ठोस कदम जरूरी
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु संकट लगातार बढ़ रहा है, इसलिए केवल चर्चा ही नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण के उपायों को व्यवहार में लागू करना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार विरासत के साथ विकास की नीति पर काम कर रही है।
ग्रीन स्टील और सोलर ऊर्जा को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ देश में स्टील उत्पादन का बड़ा केंद्र है और इस क्षेत्र में कार्बन फुटप्रिंट कम करने के लिए ग्रीन स्टील जैसे नवाचार अपनाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सोलर रूफटॉप योजना के जरिए उपभोक्ताओं को ऊर्जा उत्पादक बनाया जा रहा है और बायो-एथेनॉल जैसे क्षेत्रों में भी निवेश की संभावनाएं बढ़ रही हैं।
वन और पर्यावरण संरक्षण में छत्तीसगढ़ अग्रणी
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय वन सर्वेक्षण रिपोर्ट 2023 के अनुसार संयुक्त वन और वृक्ष आवरण वृद्धि के मामले में छत्तीसगढ़ देश में प्रथम स्थान पर है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश का लगभग 44 प्रतिशत क्षेत्र वन से आच्छादित है और जनजातीय समाज में वृक्षों को सर्ना (देवता) के रूप में पूजा जाता है।
पर्यावरण जागरूकता के लिए अभियान
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियान चलाकर लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि सभी विभागों में ई-ऑफिस व्यवस्था लागू होने से समय और संसाधनों की बचत के साथ कागज के उपयोग में भी कमी आई है।
तीन पुस्तकों का किया विमोचन
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने
- “एब्स्ट्रेक्ट” (सम्मेलन में प्रस्तुत शोधों का संकलन)
- “हाइलाइट्स ऑफ द समिट”
- “कथा कंथली” (जनजातीय कहानियों और परंपराओं पर आधारित पुस्तक)
का विमोचन भी किया।
इस अवसर पर मेघालय के लोकायुक्त सी. पी. मारक, पीआरएसयू के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद शुक्ल, पीसीसीएफ वी. श्रीनिवास राव, विबग्योर फाउंडेशन के अध्यक्ष शंखदीप चौधरी सहित कई विशेषज्ञ, शोधकर्ता और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

