चैत्र नवरात्रि का आठवां दिन मां महागौरी को समर्पित होता है, जिसे महाष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष महाष्टमी 26 मार्च 2026 को मनाई जा रही है और अष्टमी तिथि सुबह 11:48 बजे तक रहेगी। इस दिन मां महागौरी की पूजा करने से सुख-समृद्धि, शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है।
पौराणिक कथा
मान्यता के अनुसार, भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या के कारण मां पार्वती का शरीर काला पड़ गया था। बाद में भगवान शिव ने गंगाजल से उनका अभिषेक किया, जिससे उनका स्वरूप अत्यंत गौर और दिव्य हो गया। इसी कारण उन्हें मां महागौरी कहा जाता है।
मां महागौरी का स्वरूप
मां महागौरी का स्वरूप शांति, पवित्रता और सौम्यता का प्रतीक है। वे श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और वृषभ (बैल) पर सवार रहती हैं, इसलिए उन्हें वृषारूढ़ा भी कहा जाता है। उनके चार हाथों में त्रिशूल, डमरू, वरमुद्रा और अभयमुद्रा होती हैं।
पूजा का शुभ मुहूर्त
महाष्टमी के दिन पूजा का शुभ समय सुबह 6:50 बजे से 8:21 बजे तक है। इस दौरान विधि-विधान से पूजा करना शुभ माना जाता है।
कन्या पूजन मुहूर्त
कन्या पूजन का शुभ समय सुबह 10:55 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक रहेगा।
मां महागौरी पूजा विधि
- पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
- चौकी पर माता की स्थापना करें और साथ में गणेश, नवग्रह व अन्य देवी-देवताओं का पूजन करें।
- मां महागौरी को नारियल का भोग अर्पित करें।
- रातरानी या सुगंधित फूलों से पूजा करें।
- दुर्गा सप्तशती के मंत्रों का पाठ करें।
भोग और प्रिय वस्तुएं
मां महागौरी को नारियल का भोग अत्यंत प्रिय है। उन्हें सफेद रंग की वस्तुएं अर्पित करना शुभ माना जाता है, जो पवित्रता का प्रतीक हैं।
मां महागौरी के मंत्र
बीज मंत्र – “ॐ देवी महागौर्यै नमः॥”
ध्यान मंत्र – “श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥”
स्तुति मंत्र – “सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोऽस्तुते॥”
पूजा के लाभ
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां महागौरी की पूजा करने से अविवाहित कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति होती है और विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। इसके साथ ही जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और पापों का नाश होता है।

