रायपुर। बघेल एंड कंपनी..घोटाले की कुंडली! जानिए कहां-कहां से आता था कैश का बंडल और कौन है वो शख्स जो खोल रहा बघेल की पोल पूर्व सीएम के बेटे की गिरफ्तारी के बाद पूरे प्रदेश में कांग्रेस पार्टी प्रदर्शन कर रही है। लेकिन पूर्व सीएम के बेटे तक पहुंचने के लिए ईडी ने कई महीने तक फील्डिंग की। पहले से पकड़े गए लोगों से पूछताछ और जांच के दौरान लिंक मिले उसे जोड़कर ईडी चैतन्य बघेल तक पहुंची।
बघेल एंड कंपनी..घोटाले की कुंडली जानिए कहां-कहां से आता था कैश का बंडल और कौन है वो शख्स जो खोल रहा बघेल की पोल सूत्र बताते हैं कि चैतन्य बघेल की दो फर्मों को एक कारोबारी से 5 करोड़ रुपए मिले। ये राशि शराब घोटाले से मिले नकदी के बदले हस्तांतरित की गई है। चैतन्य बघेल ने इस भुगतान पर कोई ब्याज भी नहीं दिया। वहीं, 5 करोड़ में से 4.5 करोड़ रुपए अभी भी आरईसी पुनर्भुगतान के लिए लंबित है। पप्पू बंसल ने ED से इसकी पुष्टि की है। शराब घोटाले का बड़ा हिस्सा पप्पू बंसल को सौंपा जा रहा था।
पप्पू बंसल ने स्वीकार किया है कि उसने चैतन्य बघेल के साथ मिलकर शराब घोटाले की 1000 करोड़ रुपए से अधिक की नकदी संभाली थी। पप्पू बंसल ने पूछताछ में ये भी स्वीकार किया कि उसे 3 महीने में 136 करोड़ रुपए मिले। पप्पू बंसल ने 80-100 करोड़ रुपए नकद चैतन्य बघेल के निर्देश पर केके श्रीवास्तव को सौंपे। अनवर ढेबर और नितेश पुरोहित के बीच फोन पर बातचीत में भी इस पर चर्चा हुई थी। दीपेन चावड़ा के माध्यम से अनवर ढेबर से ये राशि जमा करते थे।
शराब के साथ ही प्रॉपर्टी के कारोबार में भी हेरफेर का मामला सामने आया है। जिसमें चैतन्य बघेल के स्वामित्व वाली मेसर्स बघेल डेवलपर्स पर कई आरोप लगे। बघेल डेवलपर्स की विट्ठल ग्रीन परियोजना में वित्तिय गड़बड़ियां पाई गईं, परियोजना की कुल लागत को कागजों में कम दिखाया गया। 13 से 15 करोड़ की लागत को कागजों में 7 करोड़ 14 लाख बताया गया और निर्माण कंपनी को बघेल डेवलपर्स ने केवल 2.62 करोड़ का भुगतान किया। जबकि आईकास्ट ने 4.20 करोड़ का नगद भुगतान किया गया। चैतन्य बघेल के कई करीबी सहयोगियों ने उक्त परियोजना में निवेश किया। वहीं, एक कारोबारी ने 80 लाख रुपये मूल्य के 6 प्लॉट में निवेश किया, जिससे चैतन्य बघेल को 16.70 करोड़ रुपये की आपराधिक आय हुई। 1000 करोड़ रुपये से अधिक के लेन-देन में भी भूमिका चैतन्य ने आपराधिक आय के वास्तविक स्रोत को परियोजना में शामिल कर छिपाया।
पप्पू बंसल, अनवर ढेबर, दीपेंद्र और केके श्रीवास्तव और रामगोपाल अग्रवाल से चैतन्य के व्यापारिक कनेक्शन की जांच ED कर रही है। इस पूरे कॉकस ने मिलकर काले कारोबार का कितना बड़ा नेटवर्क खड़ा किया। इसके और कितने मोहरे हैं, ये सभी अब चैतन्य बघेल से पूछताछ के बाद सामने आ सकता है।

