रायपुर। पूर्व संसदीय सचिव एवं लोकसभा प्रत्याशी विकास उपाध्याय ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बालोद जिले में आयोजित राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि जिन आयोजनों से देश को अनुशासन, सेवा और राष्ट्रप्रेम का पाठ पढ़ाने की अपेक्षा की जाती है, यदि उन्हीं आयोजनों में भ्रष्टाचार के आरोप सामने आने लगें, तो यह केवल आर्थिक नहीं बल्कि नैतिक संकट का विषय बन जाता है।
विकास उपाध्याय ने कहा कि जंबूरी आयोजन में करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन न तो विधिवत टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई और न ही आयोजन स्थल के भौतिक सत्यापन को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने आई है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने आयोजन स्थल का भौतिक निरीक्षण किया था? यदि किया गया, तो इतनी बड़ी अनियमितताएं कैसे नजरअंदाज कर दी गईं और यदि नहीं किया गया, तो करोड़ों रुपये का भुगतान किस आधार पर स्वीकृत किया गया।
उन्होंने कहा कि यह समझ से परे है कि लगभग पांच करोड़ रुपये के कार्य में से दो करोड़ रुपये केवल अस्थायी शौचालयों पर खर्च दिखाया गया है। क्या यह जंबूरी आयोजन था या अस्थायी निर्माण का उत्सव? क्या देशभक्ति अब प्रति टेंट और प्रति टॉयलेट की दर से आंकी जाएगी?
उपाध्याय ने बताया कि 1200 वीआईपी लोगों के ठहरने के लिए बनाए गए स्विस टेंट पर 64 लाख रुपये का बिल जारी किया गया है। वहीं, 15 हजार बच्चों के ठहरने के लिए 2000 टेंट के नाम पर 76 लाख रुपये का कार्यादेश जारी हुआ है। जबकि आयोजन स्थल का मुआयना करने पर वास्तविकता यह है कि वहां 100 से अधिक शौचालय नहीं बने हैं और लगभग 800 टेंट ही नजर आते हैं।
उन्होंने कहा कि चूंकि यह अस्थायी निर्माण कार्य है, इसलिए दो-चार दिन बाद कोई भौतिक साक्ष्य शेष नहीं रहेगा। ऐसे में कार्यादेश में दर्शाई गई संख्या के आधार पर भुगतान कर जनता के पैसों की लूट की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
विकास उपाध्याय ने चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनके द्वारा उठाए गए प्रश्न गलत हैं, तो माननीय मंत्री तत्काल एक स्वतंत्र टीम गठित कर भौतिक सत्यापन के आदेश दें। आयुक्त, जिला कलेक्टर एवं जिला शिक्षा अधिकारी स्वयं स्थल का निरीक्षण कर यह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करें कि कार्यादेश के अनुसार 400 शौचालय और 2000 टेंट वास्तव में लगाए गए हैं या नहीं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंत्री के करीबी ठेकेदार के माध्यम से सरकारी धन की खुलेआम लूट की जा रही है। उपाध्याय ने कहा कि वर्ष 2015 से 2019 के बीच स्काउट-गाइड आयुक्त के कार्यकाल में आयोजित तीन जंबूरी में भी 12 करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी राशि की अनियमितता सामने आई थी।
अंत में उन्होंने कहा कि सरकार मंचों से भले ही ‘भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस’ की बात करती हो, लेकिन अब समय आ गया है कि वह इसे केवल भाषणों तक सीमित न रखे, बल्कि ऐसे मामलों में ठोस कार्रवाई कर जवाबदेही तय करे। क्योंकि यदि देशभक्ति के नाम पर भी पारदर्शिता नहीं होगी, तो व्यवस्था पर विश्वास बनाए रखना कठिन हो जाएगा।

