सुकमा। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में ‘नक्सल मुक्त बस्तर’ के संकल्प को आज एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। जिला सुकमा में संचालित नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत माओवादी संगठन में सक्रिय 22 सदस्यों ने सुरक्षा बलों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वालों में एक महिला माओवादी भी शामिल है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ये सभी माओवादी छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति और सुकमा पुलिस द्वारा संचालित “पूना मारगेम” (पुनर्वास से पुनर्जीवन) अभियान से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौटे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि अंदरूनी क्षेत्रों में नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना, बेहतर सड़क कनेक्टिविटी और शासन की योजनाओं की बढ़ती पहुंच के कारण माओवादी संगठन का प्रभाव क्षेत्र तेजी से कमजोर हो रहा है।
वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में आत्मसमर्पण
17 फरवरी 2026 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय सुकमा में आयोजित कार्यक्रम में निम्नलिखित अधिकारियों की उपस्थिति में आत्मसमर्पण की प्रक्रिया पूरी हुई—
- एस. अस्ल कुमार, डीआईजी सीआरपीएफ रेंज जगदलपुर
- रोहित शाह (IPS), अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (नक्सल ऑप्स)
- अभिषेक वर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, सुकमा
- सीआरपीएफ और कोबरा वाहिनी के वरिष्ठ अधिकारी
सुरक्षा बलों की संयुक्त सफलता
इस आत्मसमर्पण को सफल बनाने में विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही—
- डीआरजी (DRG) सुकमा
- जिला बल
- रेंज फील्ड टीम (RFT) जगदलपुर
- सीआरपीएफ की 02, 111, 223, 227 वाहिनी
- कोबरा 201 वाहिनी की आसूचना शाखा
50-50 हजार की प्रोत्साहन राशि
शासन की “छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत पुनर्वास नीति-2025” के तहत सभी 22 आत्मसमर्पित माओवादियों को तत्काल सहायता के रूप में 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई।
साथ ही, उन्हें पुनर्वास नीति के तहत अन्य सुविधाएं भी दी जाएंगी, ताकि वे सामान्य जीवन की शुरुआत कर सकें और समाज की मुख्यधारा में स्थायी रूप से जुड़ सकें।

