बेमेतरा। ग्राम देवादा में आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ के छठवें दिन श्रद्धा और भक्ति का विशेष माहौल देखने को मिला। आसपास के गांवों सहित दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर आध्यात्मिक शांति और ऊर्जा का अनुभव किया। कथा पांडाल में भजन-कीर्तन, मंत्रोच्चार और धर्मचर्चा से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
कथा व्यास स्वामी आत्मानंद गिरी जी महाराज (पंचदश नाम जूना अखाड़ा) ने कंस वध, द्वारिका लीला और रुक्मणी मंगल के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि ईश्वर की प्राप्ति बाहरी आडंबर से नहीं, बल्कि सच्ची श्रद्धा और साधना से होती है। उन्होंने समझाया कि जैसे बिंदु जब सिंधु में मिल जाता है तो उसका अलग अस्तित्व समाप्त हो जाता है, वैसे ही मनुष्य जब ईश्वर में लीन होता है तो उसका अहंकार खत्म हो जाता है।
स्वामी जी ने अपने प्रवचन में कहा कि हिंदू धर्म कोई मात्र व्यवस्था नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। उन्होंने चरित्र निर्माण को जीवन का आधार बताते हुए कहा कि व्यक्ति की पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि उसके आचरण से होती है। समाज में नैतिकता, सेवा और करुणा की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने गौसेवा को कलियुग में मोक्ष का सरल मार्ग बताया। उन्होंने कहा कि गौ माता में लक्ष्मी का वास है और गौपालन से घर-परिवार में समृद्धि व शांति आती है।
कार्यक्रम में मुख्य यजमान सुनील वर्मा, रामखिलावन वर्मा, अहिल्या वर्मा सहित परिवारजनों ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया। इस अवसर पर माँ भद्रकाली जिला मानस संघ के अध्यक्ष देवलाल सिंहा, रामकुमार शर्मा, ओमप्रकाश शर्मा, संत वर्मा, घनश्याम साहू, चुरामन साहू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने सामूहिक रूप से कथा श्रवण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।

