नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी तनावपूर्ण हालात के बीच रूस ने बड़ा बयान दिया है। रूस का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय कानून की प्रभावशीलता लगभग समाप्त हो चुकी है।
जानकारी के अनुसार ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहे संघर्ष को आठ दिन हो चुके हैं। इस दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर मिसाइल, ड्रोन और हवाई हमलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है।
रूस ने उठाए अंतरराष्ट्रीय कानून पर सवाल
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने रूसी सरकारी टीवी ‘रूसिया’ को दिए इंटरव्यू में कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात यह संकेत देते हैं कि अंतरराष्ट्रीय कानून की व्यवस्था कमजोर पड़ चुकी है।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून सैद्धांतिक रूप से यानी ‘डी ज्यूरे’ (De Jure) कागजों पर मौजूद हो सकता है, लेकिन व्यवहारिक रूप से यानी ‘डी फैक्टो’ (De Facto) दुनिया की वर्तमान परिस्थितियों में इसका प्रभाव दिखाई नहीं देता।
क्षेत्रीय संघर्ष से बढ़ सकती है वैश्विक अस्थिरता
पेसकोव ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि अगर क्षेत्रीय संघर्ष इसी तरह बढ़ते रहे तो इसके राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के पांच स्थायी सदस्यों (P-5) की बैठक बुलाने के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के पुराने प्रस्ताव को फिर से सामने रखा है।
अमेरिका से जवाब की मांग
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी इस मुद्दे पर अमेरिका से स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को अपनी उन रणनीतियों और नीतियों को स्पष्ट करना चाहिए जिनकी वजह से ऐसे हालात बन रहे हैं।
लावरोव ने कहा कि यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि ये नीतियां अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानदंडों के अनुरूप किस तरह हैं।

