नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान भारतीय राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। विपक्षी दलों ने एकजुट होकर लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है, जिसे चर्चा के लिए स्वीकार कर लिया गया है। आज़ादी के बाद यह तीसरी बार है जब लोकसभा स्पीकर को हटाने की मांग औपचारिक प्रस्ताव के रूप में सदन में लाई गई है।
10 घंटे की मैराथन बहस
कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने स्पीकर को पद से हटाने का प्रस्ताव पेश किया, जिसे 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिला। नियमों के अनुसार प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया और इस मुद्दे पर 10 घंटे की विस्तृत चर्चा तय की गई है।
विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर लोकतांत्रिक परंपराओं की अनदेखी हुई।
सदन में तीखी नोकझोंक
बहस के दौरान सदन की अध्यक्षता कर रहे जगदंबिका पाल की भूमिका पर भी विपक्ष ने सवाल उठाए। इसी दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई के बीच तीखी बहस देखने को मिली, जिससे सदन का माहौल तनावपूर्ण हो गया।
डिप्टी स्पीकर के पद को लेकर विवाद
गौरव गोगोई ने कहा कि पहले जब भी स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव आया, तब डिप्टी स्पीकर सदन की अध्यक्षता करते थे, लेकिन इस बार यह पद खाली है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया।
संवैधानिक नियमों पर बहस
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आपत्ति जताते हुए कहा कि जब स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव हो, तो उनकी मंजूरी से नियुक्त व्यक्ति सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकता।
वहीं केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू और सांसद निशिकांत दुबे ने संविधान के अनुच्छेद 94 का हवाला देते हुए कहा कि डिप्टी स्पीकर की अनुपस्थिति में पैनल का कोई भी सदस्य सदन की कार्यवाही चला सकता है।
इतिहास में केवल दो बार आया ऐसा प्रस्ताव
भारतीय संसदीय इतिहास में इससे पहले केवल दो बार स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव लाया गया था।
- 1954: पहले लोकसभा स्पीकर जी. वी. मावलंकर के खिलाफ प्रस्ताव
- 1987: स्पीकर बलराम जाखड़ के खिलाफ प्रस्ताव
मौजूदा प्रस्ताव के बाद संसद में राजनीतिक माहौल और भी गरमा गया है।

