बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित पेंडारी नसबंदी कांड में करीब 11 साल 4 महीने बाद अदालत का फैसला आया है। जिला अदालत ने लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. आरके गुप्ता को लापरवाही से हुई मौतों का जिम्मेदार मानते हुए दोषी ठहराया है। कोर्ट ने उन्हें 2 साल की सजा और 25 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है।
एडीजे शैलेश कुमार की अदालत ने अपने फैसले में कहा कि ऑपरेशन के दौरान गंभीर लापरवाही बरती गई। ऑपरेशन थिएटर में पर्याप्त रोशनी, साफ-सफाई और जरूरी चिकित्सा सुविधाओं का अभाव था, जिसके चलते महिलाओं की जान गई। अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304(ए) के तहत दोषी पाया।
वहीं, साक्ष्यों के अभाव में दवा सप्लायर महावर फार्मा और कविता फार्मास्यूटिकल्स से जुड़े पांच आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया।
क्या है पूरा मामला
नवंबर 2014 में तखतपुर के पेंडारी और तत्कालीन बिलासपुर जिले के पेंड्रा क्षेत्र में आयोजित सरकारी नसबंदी शिविरों में बड़ी संख्या में महिलाओं की सर्जरी की गई थी। ऑपरेशन के बाद कई महिलाओं की अचानक तबीयत बिगड़ने लगी। इस घटना में 15 महिलाओं की मौत हो गई थी, जबकि 100 से अधिक महिलाओं को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।
जांच में सामने आया कि स्वास्थ्य विभाग के परिवार नियोजन लक्ष्य को पूरा करने के दबाव में डॉ. गुप्ता ने एक ट्रेनी के साथ मिलकर महज कुछ घंटों में 83 ऑपरेशन कर दिए। इतनी कम समय में और अव्यवस्थित तरीके से किए गए ऑपरेशन को ही मौतों की मुख्य वजह माना गया।

