दुर्ग (भिलाई)। जिले के भिलाई क्षेत्र में सोनोग्राफी तकनीक के दुरुपयोग का गंभीर मामला सामने आया है। भ्रूण की बीमारियों की जांच के लिए बनी यह तकनीक अब बेटियों के लिए खतरा बनती नजर आ रही है। आरोप है कि कुछ जगहों पर मौखिक संकेतों के जरिए अवैध लिंग परीक्षण किया जा रहा है, जिससे कन्या भ्रूण हत्या को बढ़ावा मिल रहा है।
जानकारी के अनुसार, जिले में 101 सोनोग्राफी केंद्र संचालित हैं, जहां प्रतिदिन करीब 1000 गर्भवती महिलाओं की जांच की जाती है। एक महिला की गर्भावस्था में 2-3 बार सोनोग्राफी कराई जा रही है, लेकिन निगरानी व्यवस्था कमजोर बताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लिंग परीक्षण के बिना कन्या भ्रूण हत्या संभव नहीं है। ऐसे में यह मामला और भी गंभीर हो जाता है।
जिले में गर्भपात (एमटीपी) के लिए 27 अधिकृत अस्पताल हैं। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच 433 वैध गर्भपात दर्ज किए गए हैं, जबकि जानकारों के अनुसार अवैध गर्भपात के मामले इससे कहीं अधिक हो सकते हैं। मेडिकल स्टोर्स पर गर्भपात की दवाओं की आसान उपलब्धता और कथित मिलीभगत से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम 1994 (PCPNDT Act) के तहत लिंग बताना गैर-जमानती अपराध है, इसके बावजूद जिले में अब तक एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि कोई औपचारिक शिकायत सामने नहीं आई है।
कलेक्टर अभिजीत सिंह ने सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जानकारी तलब की है और जल्द ही समीक्षा बैठक कर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

