नई दिल्ली/रायपुर। ईरान-अमेरिका युद्ध का असर अब दवाइयों की कीमतों पर भी दिखाई देने लगा है। दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल महंगा होने से ग्लूकोज बोतल और दवाइयों की स्ट्रिप 20 से 30 फीसदी तक महंगी हो गई हैं।
बुखार, दर्द और शुगर की दवाइयां भी हो सकती हैं महंगी
दवा कारोबारियों के अनुसार आने वाले दिनों में बुखार, दर्द और शुगर की दवाइयों के दाम भी बढ़ सकते हैं। पैरासिटामॉल, डाइक्लोफेनेक, मेटफॉर्मिन समेत कई जरूरी दवाइयों की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
विदेशों से आता है दवा बनाने का कच्चा माल
जानकारी के मुताबिक दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कई केमिकल और पैकिंग मटेरियल विदेशों से आयात किए जाते हैं। युद्ध के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है और शिपिंग खर्च भी काफी बढ़ गया है। इससे दवा कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ रही है।
पैकिंग मटेरियल भी हुआ महंगा
ग्लूकोज बोतल बनाने में उपयोग होने वाली पीवीसी बोतल, एल्युमिनियम फॉइल और अन्य पैकिंग सामग्री के दाम भी बढ़ गए हैं। इसका सीधा असर दवाइयों की कीमत पर पड़ रहा है।
अभी पुराने स्टॉक से मिल रही राहत
दवा व्यापारियों का कहना है कि फिलहाल बाजार में पुराना स्टॉक उपलब्ध होने के कारण लोगों को दवाइयां पुरानी कीमतों पर मिल रही हैं। हालांकि नया स्टॉक आने के बाद कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

