रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को बाल विवाह मुक्त बनाने का अभियान लगातार सकारात्मक परिणाम दे रहा है। इसी कड़ी में सुकमा जिले में जिला प्रशासन की तत्परता और संवेदनशील पहल से दो बाल विवाह समय रहते रोक दिए गए। यह कार्रवाई कवासीपारा, फूलबगड़ी गांव में मूसलाधार बारिश के बीच की गई।
1098 पर सूचना मिलते ही गांव पहुंची संयुक्त टीम
चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर बाल विवाह की सूचना मिलते ही जिला महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड हेल्पलाइन और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम तत्काल गांव के लिए रवाना हुई। खराब मौसम और तेज बारिश के बावजूद टीम समय पर मौके पर पहुंची और दोनों बाल विवाह रुकवाने में सफल रही।
समझाइश से बदला परिवारों का फैसला
गांव में विवाह की तैयारियां चल रही थीं। अधिकारियों ने स्थानीय परंपराओं का सम्मान करते हुए परिवारों से शांतिपूर्ण और संवेदनशील तरीके से बातचीत की। टीम ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 की जानकारी देते हुए कम उम्र में विवाह से स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों से अवगत कराया।
प्रशासन की समझाइश का सकारात्मक असर हुआ और दोनों परिवारों ने बाल विवाह स्थगित करने का निर्णय लिया। दोनों बालिकाओं ने भी अपनी पढ़ाई जारी रखने और सुरक्षित भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने की इच्छा जताई।
वैधानिक प्रक्रिया भी पूरी की गई
पूरी कार्रवाई को पारदर्शी और कानूनी रूप से सुनिश्चित करने के लिए मौके पर पंचनामा और घोषणा-पत्र तैयार कराया गया, ताकि भविष्य में बच्चों के अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रशासन की प्रतिबद्धता
यह अभियान कलेक्टर अमित कुमार के निर्देशन तथा जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी शिवदास नेताम और जिला बाल संरक्षण अधिकारी जितेंद्र सिंह बघेल के मार्गदर्शन में संचालित किया गया। कार्रवाई में संरक्षण अधिकारी (गैर संस्थागत देखरेख) मनीषा शर्मा, सेक्टर सुपरवाइजर रश्मि चन्द्रवंशी और सामाजिक कार्यकर्ता जोगेंद्र दिर्दो की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
सुकमा की यह सफलता दर्शाती है कि समय पर मिली सूचना, प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और संवेदनशील संवाद से बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है। यह पहल बच्चों के सुरक्षित, शिक्षित और उज्ज्वल भविष्य की दिशा में प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है।


