रायपुर, 25 अगस्त 2026। भाई केवल बहन की रक्षा ही नहीं करता, बल्कि उसके सपनों को उड़ान देने की कोशिश भी करता है। इसी सोच के साथ छत्तीसगढ़ सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने के लिए विभिन्न प्रयास कर रही है।
महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आसान प्रक्रिया से ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि वे अपनी रुचि और हुनर के अनुसार स्वरोजगार (Self Employment) शुरू कर सकें और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में योगदान दे सकें।
आजीविका मिशन से मिला आसान ऋण
ग्राम लुकुपाली, कोमाखान की रहने वाली दुलारी देवांगन को भी आजीविका मिशन के माध्यम से आर्थिक सहायता मिली। उन्होंने बताया कि आसान प्रक्रिया के तहत मिले ऋण से उन्होंने चाट-गुपचुप का व्यवसाय शुरू किया।
दुलारी अब अपने व्यवसाय को लगातार आगे बढ़ा रही हैं। गर्मी के मौसम में वह बर्फ गोला और लस्सी भी बेचती हैं। इसके अलावा शादी-विवाह और अन्य आयोजनों में चाट-गुपचुप, लस्सी और बर्फ गोला के ऑर्डर भी उन्हें मिलते हैं।
पति भी व्यवसाय में कर रहे सहयोग
दुलारी देवांगन के इस स्वरोजगार में अब उनके पति भी सहयोग कर रहे हैं। परिवार के दोनों सदस्य मिलकर व्यवसाय को आगे बढ़ाने में जुटे हैं।
दुलारी ने बताया कि योजना से जुड़कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि आज वह अपने हुनर और मेहनत के दम पर आत्मनिर्भर बनी हैं।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
छत्तीसगढ़ सरकार महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों और स्वरोजगार से जोड़ने पर जोर दे रही है। दुलारी देवांगन की कहानी बताती है कि आसान ऋण और सही अवसर मिलने पर महिलाएं अपने हुनर को व्यवसाय में बदलकर परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकती हैं।


