रायपुर, 1 अक्टूबर 2026। गांवों की आर्थिक समृद्धि का रास्ता खेतों से होकर गुजरता है। किसान को उपज के लिए व्यवस्थित बाजार, खेत तक सिंचाई की सुविधा, मिट्टी की सेहत की सही जानकारी और खेती के साथ पशुपालन, मछली पालन तथा उद्यानिकी जैसी गतिविधियों से अतिरिक्त आय के अवसर मिलें, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
सरगुजा जिले में कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीक और संसाधनों से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है। सिंचाई, जल संरक्षण, मृदा परीक्षण और कृषि विविधीकरण के साथ पशुपालन एवं मछली पालन को भी आजीविका से जोड़ा जा रहा है।
धान खरीदी से किसानों को मिला व्यवस्थित बाजार
सरगुजा जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के दौरान बड़ी संख्या में किसानों ने धान उपार्जन में भागीदारी की। जिले में 60 हजार से अधिक किसानों का पंजीयन हुआ।
धान खरीदी केंद्रों पर ऑनलाइन टोकन, नमी परीक्षण, बारदाना और भुगतान की व्यवस्था के साथ किसानों के लिए पेयजल एवं बैठने जैसी सुविधाओं पर भी ध्यान दिया गया। इससे किसानों को अपनी कृषि उपज के विक्रय की प्रक्रिया में सुविधा मिली और बाजार तक पहुंच का आधार मजबूत हुआ।
8,893 किसानों को सौर पंप का लाभ
खेती में सिंचाई की उपलब्धता फसल विविधीकरण के लिए महत्वपूर्ण है। सरगुजा में सौर सुजला योजना के माध्यम से किसानों को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई सुविधा से जोड़ा जा रहा है।
वर्ष 2016-17 से अब तक जिले के 8,893 किसानों को सौर पंप का लाभ मिला है। सौर सिंचाई की सुविधा से किसानों के लिए धान के साथ दूसरी फसलें लेने की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।
लबेद सिंह ने अपनाई बहुफसली खेती
लखनपुर विकासखंड के ग्राम ईरगंवा निवासी किसान लबेद सिंह इसका उदाहरण हैं। सौर पंप की सुविधा मिलने के बाद उन्होंने धान के साथ दलहन, तिलहन, सब्जियों, फलदार पौधों और फूलों की खेती शुरू की। इसके साथ उन्होंने मछली पालन को भी अपनी आजीविका से जोड़ा।
मृदा परीक्षण से वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा
खेती में अधिक उर्वरक का उपयोग ही बेहतर उत्पादन की गारंटी नहीं है। फसल और मिट्टी की जरूरत के अनुसार संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन महत्वपूर्ण है।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड और मृदा परीक्षण के माध्यम से किसानों को मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों और उनकी कमी की जानकारी मिल रही है। इसके आधार पर किसान फसल की आवश्यकता के अनुसार उर्वरकों और अन्य पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग कर सकते हैं।
इससे अनावश्यक उर्वरक उपयोग और लागत को नियंत्रित करने के साथ फसल की उत्पादकता एवं गुणवत्ता में सुधार की संभावना बढ़ती है। कृषि विशेषज्ञ किसानों को फसल लेने से पहले मृदा परीक्षण कराने और मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार पोषक तत्व प्रबंधन की सलाह दे रहे हैं।
‘मोर गांव मोर पानी’ से जल संरक्षण को बढ़ावा
खेती के स्थायी विकास के लिए जल संरक्षण महत्वपूर्ण है। सरगुजा में ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के माध्यम से वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और स्थानीय जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में कार्य किए गए हैं।
जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण कर उपलब्ध पानी को सहेजने पर जोर दिया गया। विभागीय विवरण के अनुसार कई स्थानों पर भूजल स्तर में 1 से 2 मीटर तक सुधार दर्ज किया गया।
भूजल की उपलब्धता बेहतर होने से सिंचाई और विशेष रूप से रबी फसलों की संभावनाओं को मजबूती मिलने की बात कही गई है।
डबरी से सिंचाई के साथ मछली पालन का अवसर
अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम कुम्हरता की सूरत कुमारी ने ग्रामीण रोजगार योजना के माध्यम से अपने खेत में डबरी का निर्माण कराया। वर्ष 2024-25 में 2.99 लाख रुपये की स्वीकृति से बनी इस डबरी में लगभग छह फीट पानी उपलब्ध रहने से सिंचाई में मदद मिल रही है।
डबरी के पानी का उपयोग सब्जी, गेहूं और अरहर जैसी फसलों की खेती में किया जा रहा है। इसके साथ मछली पालन को भी आजीविका से जोड़ा गया है। इस तरह जल संरक्षण की एक संरचना सिंचाई, कृषि विविधीकरण और अतिरिक्त आय की संभावनाओं का आधार बन रही है।
‘सरगुजा छेरी बैंक’ से महिलाओं को पशुपालन से जोड़ने की पहल
खेती के साथ पशुपालन भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरगुजा में ग्रामीण महिलाओं को पशुपालन के माध्यम से आजीविका से जोड़ने के लिए ‘सरगुजा छेरी बैंक’ मॉडल की पहल की गई है।
इसके प्रारंभिक चरण में 50 महिलाओं को 76 बकरियों के साथ इस पहल से जोड़ा गया। मॉडल के तहत महिलाओं को नकद ऋण के बजाय बकरियां उपलब्ध कराई जाती हैं और निर्धारित व्यवस्था के अनुसार चार वर्षों में 16 मेमने लौटाने होते हैं।
इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को पशुपालन के जरिए आय का अवसर उपलब्ध कराना और इसी संसाधन को आगे अन्य हितग्राहियों तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित करना है।
एक फसल से आगे बढ़कर आय के विविध स्रोत
सरगुजा में कृषि विकास अब केवल धान या किसी एक फसल तक सीमित नहीं है। सिंचाई, मृदा परीक्षण, जल संरक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग से किसानों के लिए दलहन, तिलहन, सब्जी, फल-फूल और अन्य फसलों को अपनाने की संभावनाएं बढ़ रही हैं।
खेती के साथ मछली पालन और पशुपालन को जोड़ने से ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आय के स्रोत भी तैयार हो रहे हैं।
समृद्ध किसान से मजबूत गांव की ओर
किसान की आर्थिक स्थिति केवल फसल उत्पादन बढ़ने से नहीं, बल्कि खेती की लागत के बेहतर प्रबंधन, सिंचाई की उपलब्धता, बाजार तक पहुंच और आय के विविध स्रोत विकसित होने से भी जुड़ी है।
सरगुजा में धान खरीदी से बाजार तक पहुंच, सौर पंपों से सिंचाई, मृदा परीक्षण से वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन, जल संरक्षण से खेती को स्थायित्व तथा पशुपालन और मछली पालन से अतिरिक्त आजीविका के अवसर तैयार किए जा रहे हैं।
कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़े इन प्रयासों का समन्वय खेत से परिवार और परिवार से गांव तक आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने की दिशा में आधार तैयार कर रहा है। किसानों को संसाधन, तकनीक और अवसरों से जोड़ने की प्रक्रिया ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।


