43 लाख परिसरों में लग चुके स्मार्ट मीटर, खपत में अवांछित वृद्धि नहीं; 1.11 लाख से अधिक सोलर प्लांट स्थापित
रायपुर। छत्तीसगढ़ में बिजली व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए स्मार्ट मीटर तथा प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। स्मार्ट मीटर के जरिए बिजली खपत की निगरानी अधिक पारदर्शी तरीके से हो रही है, वहीं पीएम सूर्यघर योजना के माध्यम से घरेलू उपभोक्ता सौर ऊर्जा अपनाकर बिजली बिल में कमी के साथ केंद्र और राज्य सरकार की सब्सिडी का लाभ ले रहे हैं।
प्रदेश में कुल 52 लाख 28 हजार घरेलू बिजली उपभोक्ता हैं। इनमें से 47 लाख से अधिक उपभोक्ता मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जनअभियान योजना का लाभ ले रहे हैं।
स्मार्ट मीटर से बिजली खपत में नहीं हुई अवांछित वृद्धि
विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 में 200 यूनिट से कम मासिक बिजली खपत वाले घरेलू उपभोक्ताओं की संख्या 41.40 लाख थी। 200 से 400 यूनिट खपत वाले उपभोक्ता 6.85 लाख और 400 यूनिट से अधिक खपत वाले उपभोक्ता 2.71 लाख थे।
वर्ष 2026-27 में यह संख्या क्रमशः 42.40 लाख, 7.34 लाख और 2.56 लाख हो गई है। विभाग के अनुसार पिछले वर्ष की तुलना में मासिक बिजली खपत में कोई अप्रत्याशित वृद्धि नहीं हुई है और यह सामान्य वार्षिक वृद्धि के अनुरूप है।
विभाग का कहना है कि स्मार्ट मीटर और गैर-स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं में खपत की वृद्धि लगभग समान अनुपात में हुई है।
मई 2025 से जुलाई 2026 तक के आंकड़ों का विश्लेषण
मई 2025 से जुलाई 2026 तक के विभिन्न महीनों के आंकड़ों और विश्लेषण के आधार पर विभाग ने कहा है कि स्मार्ट मीटर लगाए जाने के कारण उपभोक्ताओं की बिजली खपत में किसी प्रकार की अवांछित वृद्धि नहीं हुई है।
यदि किसी उपभोक्ता को स्मार्ट मीटर लगने के बाद अधिक बिजली बिल आने की शिकायत होती है, तो उसके परिसर में चेक मीटर लगाने का प्रावधान भी किया गया है।
43 लाख परिसरों में स्मार्ट मीटर स्थापित
छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर लगाने के लिए 13 जुलाई 2022 को डीपीआर स्वीकृत किया गया था। इसके बाद 11 अप्रैल 2023 को टेंडर जारी किया गया और मई 2023 में प्रदेश में 55 लाख स्मार्ट मीटर लगाने के लिए कंपनियों को एलओए जारी किया गया।
वर्तमान में करीब 43 लाख उपभोक्ता परिसरों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं।
इनमें से 7,780 परिसरों में स्मार्ट मीटर के साथ चेक मीटर भी लगाया गया है। विभाग के अनुसार इन परिसरों में स्मार्ट मीटर और चेक मीटर में दर्ज बिजली खपत का अंतर निर्धारित मानक सीमा के भीतर पाया गया है।
सभी उपभोक्ता परिसरों में स्मार्ट मीटर का प्रावधान
विभागीय जानकारी के अनुसार केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के विनियम 2026 के तहत सभी उपभोक्ता परिसरों में स्मार्ट मीटर लगाया जाना अनिवार्य किया गया है।
400 यूनिट तक खपत पर ऊर्जा राहत
घरेलू उपभोक्ताओं के लिए मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जनअभियान योजना के तहत भी राहत का प्रावधान है। जिन घरेलू उपभोक्ताओं की मासिक खपत 400 यूनिट तक है, उन्हें 200 यूनिट की खपत पर 50 प्रतिशत की छूट दी जा रही है।
प्रदेश में लगभग 15 लाख बीपीएल श्रेणी के उपभोक्ताओं को 30 यूनिट प्रतिमाह मुफ्त बिजली दी जा रही है। वहीं 31 से 100 यूनिट तक बिजली का उपयोग करने वाले बीपीएल उपभोक्ताओं को मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जनअभियान योजना के तहत अतिरिक्त छूट एवं सहायता का लाभ दिया जा रहा है।
पीएम सूर्यघर योजना से बिजली बिल में कमी
पीएम सूर्यघर योजना के तहत सोलर प्लांट लगाने वाले घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली बिल में कमी के साथ सब्सिडी का लाभ मिल रहा है। विभाग के अनुसार कई उपभोक्ताओं का बिजली बिल लगभग शून्य या पहले की तुलना में काफी कम हुआ है।
योजना के तहत 3 किलोवाट क्षमता के सोलर प्लांट पर केंद्र सरकार की ओर से अधिकतम ₹78 हजार तथा राज्य सरकार की ओर से ₹30 हजार तक की सब्सिडी का प्रावधान है।
सोलर प्लांट की लागत के लिए राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा 6 प्रतिशत से कम ब्याज दर पर ₹2 लाख तक का ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।
केंद्र से ₹661 करोड़ और राज्य से ₹225 करोड़ की सहायता
प्रदेश में पीएम सूर्यघर योजना के तहत अब तक लाभार्थी उपभोक्ताओं को केंद्र सरकार की ओर से ₹661 करोड़ तथा राज्य सरकार की ओर से ₹225 करोड़ की राशि प्रदान की जा चुकी है।
प्रदेश में अब तक 1 लाख 11 हजार 713 सोलर प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें से 35 हजार से अधिक सोलर उपभोक्ताओं के बिजली बिल शून्य आ रहे हैं।
विभाग के अनुसार पिछले वर्ष की तुलना में 60 हजार से अधिक अतिरिक्त लाभार्थी उपभोक्ता मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जनअभियान योजना का लाभ ले रहे हैं।
रोजाना 500 से अधिक नए सोलर प्लांट
पीएम सूर्यघर योजना के प्रति बढ़ते रुझान के चलते प्रदेश में अब प्रतिदिन 500 से अधिक सोलर प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं।
खास तौर पर वे उपभोक्ता, जिनकी मासिक बिजली खपत 400 यूनिट से अधिक होने के कारण उन्हें मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जनअभियान योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा था, वे सोलर प्लांट लगाकर बिजली खपत कम कर रहे हैं। इससे उन्हें सोलर योजना की सब्सिडी के साथ बिजली राहत योजना का लाभ लेने का अवसर मिल रहा है।
विभाग के अनुसार कई उपभोक्ताओं के सोलर प्लांट लगने के बाद उनका बिजली बिल कम हुआ है और वे निचले खपत स्लैब में आ गए हैं। इसी वजह से 200 यूनिट से कम तथा 200 से 400 यूनिट वाले उपभोक्ताओं की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है।
मासिक खपत के अनुसार घरेलू उपभोक्ताओं की संख्या
| मासिक खपत | जुलाई 2025-26 | जुलाई 2026-27 |
|---|---|---|
| 200 यूनिट से कम | 41.40 लाख | 42.40 लाख |
| 200–400 यूनिट | 6.85 लाख | 7.34 लाख |
| 400 यूनिट से अधिक | 2.71 लाख | 2.56 लाख |
400 यूनिट से अधिक खपत वाले उपभोक्ता निचले स्लैब में आए
विभाग के अनुसार पीएम सूर्यघर योजना के तहत सोलर प्लांट लगाने के बाद 400 यूनिट से अधिक बिजली खपत करने वाले कई उपभोक्ता 400 यूनिट से कम खपत वाले वर्ग में आए हैं। इसी तरह 200 से 400 यूनिट वाले कुछ उपभोक्ता 200 यूनिट से कम खपत वाले स्लैब में आ गए हैं।
राज्य सरकार का कहना है कि स्मार्ट मीटर और सौर ऊर्जा योजनाओं के माध्यम से बिजली उपभोक्ता सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाने, ऊर्जा बचत को प्रोत्साहित करने और उपभोक्ताओं को सुविधाजनक सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।


