रायपुर, 4 अक्टूबर 2026। संपत्ति की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए अलग से आवेदन और कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम हो जाए, तो नागरिकों के लिए पूरी प्रक्रिया आसान हो जाती है। कांकेर जिले के अभनपुर-सरोना निवासी किसान श्री चंद्रशेखर निषाद ने पंजीयन व्यवस्था में हुए ऐसे ही तकनीकी बदलाव का लाभ उठाया।
संपत्ति का पंजीयन होने के बाद ऑटोम्यूटेशन के माध्यम से नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ी और उनका नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज हो गया। इससे उनका समय बचा और नामांतरण के लिए अलग से कार्यालय जाने की जरूरत नहीं पड़ी।
‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत पंजीयन विभाग से संवाद में चंद्रशेखर निषाद ने अपने अनुभव साझा किए।
रजिस्ट्री हुई और नामांतरण भी, चंद्रशेखर का बचा समय
चंद्रशेखर निषाद ने बताया कि पहले संपत्ति के पंजीयन के बाद नामांतरण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए अलग से प्रक्रिया करनी पड़ती थी और इसमें समय लगता था। इस बार ऑटोम्यूटेशन सुविधा के कारण रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ी और उनका नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज हो गया।
उन्होंने कहा, “मेरा नामांतरण तुरंत हो गया। इससे मेरे समय की बहुत बचत हुई और मुझे अलग से कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़े।”
ऑटोम्यूटेशन व्यवस्था के तहत संपत्ति का पंजीयन होने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः आगे बढ़ने से नागरिकों को अलग से आवेदन करने और संबंधित कार्यालयों में जाकर प्रक्रिया पूरी कराने की आवश्यकता कम हो रही है। किसानों और आम नागरिकों के लिए यह सुविधा संपत्ति से जुड़े कार्यों को अधिक सहज बनाने में मददगार है।
आधार आधारित पहचान सत्यापन से बढ़ी पारदर्शिता
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पंजीयन सेवाओं को सरल, सुगम और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए तकनीक आधारित सुधार किए गए हैं।
पंजीयन व्यवस्था में आधार आधारित प्रमाणीकरण के माध्यम से क्रेता, विक्रेता और गवाहों की पहचान सत्यापन की व्यवस्था की गई है। इससे पक्षकारों की पहचान सुनिश्चित करने और गलत पहचान के आधार पर पंजीयन की आशंका को कम करने में मदद मिलती है।
ऑनलाइन अपॉइंटमेंट और डिजिटल भुगतान की सुविधा
पंजीयन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, ऑनलाइन भुगतान और डिजिटल दस्तावेज जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।
नागरिक नेट बैंकिंग और UPI जैसे डिजिटल माध्यमों से पंजीयन शुल्क का भुगतान कर सकते हैं। इससे पंजीयन प्रक्रिया में समय की बचत के साथ पारदर्शिता और सुविधा बढ़ाने में मदद मिल रही है।
रजिस्ट्री के बाद की प्रक्रिया भी हुई आसान
चंद्रशेखर निषाद का अनुभव बताता है कि पंजीयन व्यवस्था में किए गए तकनीकी सुधारों का लाभ केवल रजिस्ट्री तक सीमित नहीं है। रजिस्ट्री के बाद होने वाली नामांतरण प्रक्रिया को भी इससे अधिक सहज बनाया जा रहा है।
ऑटोम्यूटेशन के माध्यम से नामांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ने से नागरिकों को अलग से इंतजार और कार्यालयीन दौड़भाग से राहत मिल रही है।
सेवा संकल्प अभियान में सामने आया बदलाव का जमीनी अनुभव
‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत सामने आई चंद्रशेखर निषाद की कहानी पंजीयन सेवाओं में हो रहे तकनीकी बदलाव की जमीनी तस्वीर प्रस्तुत करती है। रजिस्ट्री और नामांतरण की प्रक्रियाओं के बीच बेहतर समन्वय से ना


