रायपुर। छत्तीसगढ़ में सितंबर के अंतिम सप्ताह में हुई भारी बारिश और बाढ़ के बाद राज्य सरकार ने राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार सक्रिय हैं। अब तक प्रदेशभर में 49,793 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया है, जबकि प्रभावित परिवारों के लिए 152 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। इन शिविरों में 11,945 से अधिक लोगों के रहने और भोजन की व्यवस्था की गई है।
राज्य सरकार के आकलन के अनुसार, 1 जून से 30 सितंबर 2026 के दौरान हुई बारिश और विशेष रूप से 23 से 29 सितंबर के बीच हुई मूसलाधार बारिश एवं बाढ़ से प्रदेश के 33 में से 22 से अधिक जिले प्रभावित हुए। नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ने से 1,083 गांवों के 74,130 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।
सुकमा और बस्तर में सबसे ज्यादा असर
भारी बारिश और बाढ़ का सबसे ज्यादा प्रभाव दक्षिण छत्तीसगढ़ के सुकमा और बस्तर जिलों में देखने को मिला। सुकमा जिले के 25 गांवों में 40,714 लोग, जबकि बस्तर जिले के 145 गांवों में 20,212 लोग प्रभावित हुए हैं।
इसके अलावा रायपुर, धमतरी, बालोद, बलौदाबाजार, गरियाबंद, कोरबा, बेमेतरा, कबीरधाम, दुर्ग, रायगढ़ और जांजगीर-चांपा सहित कई अन्य जिलों में भी बारिश और जलभराव से जनजीवन प्रभावित हुआ।
49 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया
बाढ़ और जलभराव की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। आपदा प्रबंधन और जिला प्रशासन की टीमों ने लगातार अभियान चलाकर बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया।
अब तक 49,793 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इनमें अकेले सुकमा जिले में 40 हजार से अधिक और रायपुर जिले में 5,600 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।
प्रभावित नागरिकों के लिए प्रदेशभर में 152 राहत शिविर बनाए गए हैं। इन शिविरों में करीब 11,945 लोगों के रहने और भोजन की व्यवस्था की गई है।
15 लोगों की मौत, 1,220 से ज्यादा पशुधन की हानि
भारी बारिश और बाढ़ से प्रदेश में जान-माल का भी नुकसान हुआ है। अब तक बारिश और बाढ़ से संबंधित हादसों में 15 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। वहीं 1,220 से अधिक पशुधन की हानि हुई है।
प्राकृतिक आपदा के कारण 2,103 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि 7,947 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा 6,154 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फसलें प्रभावित हुई हैं।
प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता
राज्य सरकार ने जनहानि, पशुहानि, मकान और फसल क्षति के मामलों में प्रभावित परिवारों तक आर्थिक सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया तेज की है।
- जनहानि: ₹16 लाख की राहत राशि वितरित, ₹24 लाख से अधिक भुगतान प्रक्रियाधीन।
- पशुहानि: ₹26.17 लाख से अधिक वितरित, ₹2.18 लाख का भुगतान शेष।
- मकान क्षति: ₹1.61 करोड़ से अधिक की सहायता स्वीकृत एवं वितरित, जबकि ₹20.26 लाख का भुगतान जल्द किया जाना है।
- फसल क्षति: ₹12.82 लाख की क्षतिपूर्ति जारी, जबकि ₹4.96 लाख से अधिक का वितरण शेष है।
इन मदों में स्वीकृत एवं वितरित राशि मिलाकर सरकार द्वारा ₹2.16 करोड़ से अधिक की राहत सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है। उपलब्ध रिपोर्टों में भी दो करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दिए जाने की पुष्टि की गई है।
शेष नुकसान का जल्द होगा आकलन
राज्य सरकार ने प्रभावित जिलों में शेष नुकसान का आकलन जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। रायगढ़, जांजगीर-चांपा, कोरबा, दुर्ग और गरियाबंद सहित प्रभावित जिलों में राजस्व एवं मैदानी अमले को नुकसान का अंतिम आकलन कर पात्र हितग्राहियों तक राहत राशि पहुंचाने की प्रक्रिया तेज करने को कहा गया है।
प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव कार्यों के साथ-साथ नुकसान के आकलन और आर्थिक सहायता वितरण का काम भी समानांतर रूप से किया जा रहा है। सरकार की प्राथमिकता प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पात्र परिवारों को नियमानुसार जल्द राहत उपलब्ध कराने की है।


