रायपुर। खेती-बाड़ी का कोई साधन नहीं होने के बावजूद सरगुजा जिले की लाजो ने स्वरोजगार को अपने परिवार की आजीविका का मजबूत आधार बना लिया है। स्व-सहायता समूह से मिले एक लाख रुपये के ऋण से उन्होंने दुकान और ठेले का व्यवसाय शुरू किया। आज इसी व्यवसाय से होने वाली आमदनी से वे चार सदस्यीय परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं और समूह से लिए गए ऋण की मूल राशि और ब्याज भी चुका रही हैं।
अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम लिबरा निवासी लाजो की कहानी बताती है कि आर्थिक सहयोग और मेहनत के जरिए ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार खड़ा कर परिवार की जिम्मेदारियां संभाल सकती हैं।
एक लाख रुपये के ऋण से शुरू किया व्यवसाय
लाजो के पास खेती-बाड़ी का कोई साधन नहीं था। परिवार के लिए नियमित आमदनी का जरिया जुटाना उनके सामने बड़ी जरूरत थी। इसी दौरान स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें एक लाख रुपये का ऋण मिला।
उन्होंने इस राशि का उपयोग अपना छोटा व्यवसाय शुरू करने में किया। लाजो ने दुकान के साथ ठेला भी शुरू किया। धीरे-धीरे व्यवसाय से आमदनी होने लगी और परिवार के लिए नियमित आय का रास्ता तैयार हो गया।
दुकान और ठेले की कमाई से चलता है परिवार
लाजो के परिवार में कुल चार सदस्य हैं। खेती-बाड़ी नहीं होने के कारण उनके व्यवसाय से होने वाली आमदनी परिवार के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक सहारा बन गई है।
दुकान और ठेले से होने वाली कमाई से वे घर के जरूरी खर्च पूरे कर रही हैं। साथ ही, व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए भी इसी आय का उपयोग कर रही हैं।
परिवार की जिम्मेदारी के साथ चुका रहीं ऋण
लाजो की कहानी की खास बात यह है कि व्यवसाय से होने वाली आमदनी से वे केवल परिवार का भरण-पोषण ही नहीं कर रही हैं, बल्कि स्व-सहायता समूह से लिए गए ऋण की मूल राशि और ब्याज का भुगतान भी कर रही हैं।
इस तरह स्वरोजगार ने उन्हें परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां संभालने के साथ ऋण की जिम्मेदारी निभाने का अवसर भी दिया है।
स्वरोजगार ने बढ़ाया आत्मविश्वास
लाजो बताती हैं कि उनका व्यवसाय अच्छी तरह चल रहा है। इससे उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने और परिवार की जिम्मेदारी खुद संभालने का भरोसा मिला है।
समूह से मिली आर्थिक सहायता के जरिए उन्होंने किसी दूसरे आय के साधन पर निर्भर रहने के बजाय अपना काम शुरू किया और धीरे-धीरे उसे परिवार की आजीविका का आधार बना लिया।
समूह की मदद से आत्मनिर्भरता की राह आसान
स्व-सहायता समूह से मिला एक लाख रुपये का ऋण लाजो के लिए सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं रहा, बल्कि यह उनके लिए खुद की आजीविका खड़ी करने का अवसर साबित हुआ।
खेती का साधन नहीं होने के बावजूद उन्होंने स्वरोजगार अपनाया और अपनी मेहनत से परिवार के लिए आय का स्थायी जरिया तैयार किया।
लाजो ने इस सहयोग के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समूह से मिली मदद के कारण वे आज अपने परिवार का भरण-पोषण कर पा रही हैं और आर्थिक रूप से अपने पैरों पर खड़ी हैं।
लाजो की कहानी ग्रामीण महिलाओं के लिए यह संदेश देती है कि आर्थिक अवसर, समूह का सहयोग और स्वयं की मेहनत मिलकर स्वरोजगार को परिवार की आजीविका का मजबूत आधार बना सकते हैं।


