जगदलपुर/रायपुर। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी की पावन भूमि जगदलपुर में आयोजित विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा उत्सव में शामिल हुईं। उन्होंने बस्तर दशहरा को छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक गौरव, सामूहिक आस्था, सामाजिक समरसता और जनजातीय विरासत का जीवंत प्रतीक बताया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि माओवाद से मुक्त बस्तर अब नवनिर्माण और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने बस्तर की विशिष्ट धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं, मुरिया दरबार की लोकतांत्रिक व्यवस्था, जनजातीय समाज की प्रतिभा और प्रकृति संरक्षण की परंपरा की सराहना की। वहीं, मुख्यमंत्री ने बस्तर में सड़क, रेल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और ग्रामीण विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। कार्यक्रम में परंपरागत प्रतिनिधियों के मानदेय में वृद्धि की भी जानकारी दी गई। अब मांझियों को 5,000 रुपये और चालकी को 3,500 रुपये मासिक मानदेय मिलेगा।
बस्तर दशहरा सामाजिक समरसता और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक: राष्ट्रपति
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि लगभग 75 दिनों तक चलने वाला बस्तर दशहरा विभिन्न समुदायों को एक सूत्र में बांधने और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को संरक्षित रखने का अनूठा उदाहरण है। इस उत्सव में विभिन्न गोत्रों, समुदायों और समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी रहती है। रथ निर्माण, रथ खींचने, पूजा-अर्चना और अन्य अनुष्ठानों में प्रत्येक समुदाय अपनी परंपरागत जिम्मेदारी निभाता है।
उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामूहिक सहभागिता, आपसी सहयोग और सांस्कृतिक निरंतरता की विशिष्ट परंपरा है। माँ दंतेश्वरी की पावन भूमि पर इस उत्सव में शामिल होना उनके लिए विशेष प्रसन्नता का विषय है।
मुरिया दरबार लोकतांत्रिक परंपराओं का उत्कृष्ट उदाहरण
राष्ट्रपति ने बस्तर दशहरा के अंतर्गत आयोजित मुरिया दरबार को जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक व्यवस्था का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस परंपरा में समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि एक साथ बैठकर जनसमस्याओं, आवश्यकताओं और सामाजिक विषयों पर विचार-विमर्श करते हैं। संवाद और सामूहिक निर्णय के माध्यम से समाधान निकालने की यह परंपरा भारतीय लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करती है।
उन्होंने बताया कि लगभग दो माह पहले राष्ट्रपति भवन में बस्तर के प्रतिनिधिमंडल से उनकी मुलाकात हुई थी। इसमें बस्तर पंडुम के विजेताओं के साथ परगना मांझी और चालकी भी शामिल थे। राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर पंडुम जैसे आयोजन जनजातीय युवाओं को अपनी संस्कृति, रीति-रिवाजों और परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जनजातीय युवाओं को अवसर मिलने पर बढ़ेगा बस्तर का गौरव
राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि जनजातीय समाज में प्रतिभा और संभावनाओं की कमी नहीं है। उचित अवसर, प्रोत्साहन और संसाधन मिलने पर जनजातीय समाज के बेटे-बेटियां जीवन के हर क्षेत्र में देश का गौरव बढ़ा सकते हैं।
उन्होंने बस्तर ओलंपिक में युवाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि खेल प्रतिभाओं को उचित मंच मिलने से बस्तर के युवा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नक्सलवाद की पीड़ा से मुक्त होकर बस्तर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ेगा और यहां के युवा देश की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
दंडकारण्य की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण जरूरी
राष्ट्रपति ने बस्तर के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि रामायण में इस अंचल का संबंध दंडकारण्य से जोड़ा जाता है। भगवान श्रीराम के वनवास और माता शबरी से जुड़े प्रसंग क्षेत्र की सांस्कृतिक स्मृतियों में विद्यमान हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत भारतीय परंपरा का अभिन्न अंग है।
उन्होंने भगवान श्रीराम के आदर्शों, माता सीता की मर्यादा और माता शबरी की भक्ति से प्रेरणा लेकर नैतिकता, मानवीय मूल्यों और सामाजिक सद्भाव को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
प्रकृति संरक्षण जनजातीय जीवन दर्शन का अभिन्न हिस्सा
राष्ट्रपति ने जनजातीय समाज की प्रकृति पूजा की परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि पेड़-पौधों, जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति सम्मान इस समाज की विशिष्ट पहचान है। जनजातीय परंपराओं में प्रकृति को जीवनदाता के रूप में देखा जाता है।
उन्होंने कहा कि जंगल, पहाड़ और प्राकृतिक संसाधन अमूल्य धरोहर हैं। इनके उपयोग के साथ संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी निभाना भी आवश्यक है। एक वृक्ष को विकसित होने में कई दशक लगते हैं, इसलिए वनों की रक्षा और अधिकाधिक पौधरोपण भविष्य की पीढ़ियों के लिए जरूरी है।
राष्ट्रपति ने जनजातीय उद्यमियों को वित्तीय सुविधाओं और बाजार से जोड़ने के प्रयासों को समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में जनजातीय समाज की भागीदारी और मजबूत होगी।
माओवाद से मुक्त बस्तर में अब नवनिर्माण और विकास की बारी: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि राष्ट्रपति का बस्तर से गहरा जुड़ाव रहा है। इसी वर्ष फरवरी में उन्होंने बस्तर पंडुम का शुभारंभ किया था और इसके विजेताओं को राष्ट्रपति भवन आमंत्रित कर सम्मानित एवं प्रोत्साहित किया था। बस्तर दशहरा में उनकी उपस्थिति से बस्तरवासियों का उत्साह बढ़ा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 75 दिनों तक चलने वाला बस्तर दशहरा यहां की लोक संस्कृति का आईना है। इसकी रस्में जनजातीय समाज के समतामूलक विचारों, सामूहिक सहभागिता और आपसी विश्वास को प्रदर्शित करती हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर हिंसक माओवाद से मुक्त होकर नवनिर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है और बस्तर पंडुम तथा बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन इस परिवर्तन को गति दे रहे हैं।
नियद नेल्लानार से दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रहीं योजनाएं
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने बस्तर की समृद्धि और विकास के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है। नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक शासकीय योजनाओं का लाभ पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और पीएम-जनमन योजना के तहत अंदरूनी बसाहटों को सड़क मार्ग से जोड़ने का काम किया जा रहा है। जहां सड़कें बन चुकी हैं, वहां मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के माध्यम से परिवहन सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि रायपुर से रावघाट तक नई रेल सेवा शुरू की गई है और रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन पर कार्य जारी है। रायपुर से विशाखापट्टनम एक्सप्रेसवे का बड़ा हिस्सा बस्तर क्षेत्र से गुजरता है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होम-स्टे की व्यवस्था हेतु विशेष प्रावधान किए गए हैं। वन धन केंद्रों के माध्यम से वनोपज संग्राहकों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं के विस्तार पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल शुरू किया गया है और गीदम में मेडिकल कॉलेज इसी शैक्षणिक सत्र से शुरू हो गया है। ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित करने का कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रपति के मार्गदर्शन और आशीर्वाद से बस्तर को देश का अग्रणी संभाग बनाने और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को पूरा करने के प्रयासों को नई मजबूती मिलेगी।
मांझियों को 5,000 और चालकी को 3,500 रुपये मासिक मानदेय
संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि बस्तर दशहरा अपनी अवधि, विशिष्ट परंपराओं, आस्था और व्यापक जनभागीदारी के कारण अलग पहचान रखता है। यह पर्व बस्तर की जीवंत सांस्कृतिक पहचान है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने परंपरागत प्रतिनिधियों के सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में कदम उठाए हैं। मांझियों का मासिक मानदेय 2,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये और चालकी का मानदेय 1,500 रुपये से बढ़ाकर 3,500 रुपये किया गया है। यह निर्णय बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने वाले परंपरागत प्रतिनिधियों के योगदान के प्रति सम्मान का प्रतीक है।
राज्यपाल ने भी बस्तर दशहरा की परंपराओं को सराहा
राज्यपाल श्री रमेन डेका ने बस्तर दशहरा और विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत के लोकतांत्रिक मूल्य हमारी सभ्यता और संस्कारों में गहराई से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि सामूहिकता जनजातीय समाज की जीवन पद्धति का अभिन्न हिस्सा है। गांवों में सामाजिक निर्णय मिल-बैठकर लिए जाते हैं और प्रत्येक व्यक्ति की आवाज को सम्मान देना इस समाज की सहज परंपरा रही है।
राज्यपाल ने कहा कि बस्तर दशहरा समाज को साथ लेकर चलने की सीख देता है। रथ के लिए लकड़ी लाने से लेकर उसके निर्माण और संचालन तक विभिन्न गांवों और समुदायों के लोग अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा और मुरिया दरबार यह संदेश देते हैं कि संवाद ही समाधान का मार्ग है।
अनेक जनप्रतिनिधि और पारंपरिक प्रतिनिधि रहे उपस्थित
कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री श्री राम विचार नेताम, शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, बस्तर सांसद एवं बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष श्री महेश कश्यप, कांकेर सांसद श्री भोजराज नाग, जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव, कोंडागांव विधायक सुश्री लता उसेंडी और महापौर श्री संजय पांडे सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, कमिश्नर श्री डोमन सिंह, आईजी श्री बीएन मीणा, कलेक्टर श्री आकाश छिकारा, एसपी श्री शलभ सिन्हा, पारंपरिक मांझी-चालकी, मेंबर-मेंबरिन, नाइक-पाइक, बस्तर दशहरा समिति के सदस्य और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक भी मौजूद रहे।


