नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के हित में बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। बकाया महंगाई भत्ता (DA) भुगतान को लेकर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने ममता बनर्जी सरकार को निर्देश दिया है कि वह कर्मचारियों के बकाया DA का 25 प्रतिशत हिस्सा 6 मार्च 2026 तक अनिवार्य रूप से भुगतान करे। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों का महंगाई भत्ता वर्ष 2008 से 2019 तक बकाया है। वर्तमान में राज्य सरकार कर्मचारियों को केवल 18 प्रतिशत की दर से DA का भुगतान कर रही है, जबकि केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को लगभग 58 से 60 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता दे रही है। देश के अधिकांश राज्यों में भी 50 प्रतिशत से अधिक DA दिया जा रहा है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्मचारियों को महंगाई भत्ता देना उनका वैधानिक अधिकार है और राज्य सरकार इससे बच नहीं सकती। अदालत ने कहा कि पहले दिए गए अंतरिम आदेश के अनुसार बकाया DA का एक हिस्सा 31 मार्च तक दिया जाना था, लेकिन अब 25 प्रतिशत भुगतान की समय-सीमा 6 मार्च तय की गई है।
बकाया DA भुगतान की प्रक्रिया और शेष राशि को किस्तों में कैसे दिया जाए, यह तय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक विशेष कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस इंदु मल्होत्रा करेंगी। कमेटी में जस्टिस तरलोचन सिंह चौहान, जस्टिस गौतम विधूडी और CAG के एक वरिष्ठ अधिकारी को शामिल किया गया है।
यह कमेटी यह तय करेगी कि कर्मचारियों को बकाया महंगाई भत्ते का भुगतान किस तरीके से और किन चरणों में किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी को 16 मई 2026 तक अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई 16 मई को होगी।
गौरतलब है कि इस फैसले से पश्चिम बंगाल के करीब 20 लाख सरकारी कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा। राज्य सरकार के अनुसार, कुल बकाया राशि लगभग 43 हजार करोड़ रुपये के आसपास है। इससे पहले मई 2022 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी राज्य सरकार को जुलाई 2008 से लंबित DA का भुगतान तीन महीने के भीतर करने का आदेश दिया था, जिसे ममता बनर्जी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

