बिलासपुर। जिले में साइबर ठगी का एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां ई-चालान के नाम पर प्राइवेट अस्पताल के एक मैनेजर से 5 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। ठगों ने पीड़ित को व्हाट्सऐप पर ई-चालान से संबंधित एक संदेश भेजा था। जैसे ही पीड़ित ने दिए गए लिंक को खोला, उसके बैंक खाते से 5 लाख रुपये की रकम निकल गई। यह मामला सिरगिट्टी थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और साइबर ठगों की तलाश की जा रही है।
पीड़ित ने पुलिस को बताया कि उसके मोबाइल पर ई-चालान भुगतान से जुड़ा एक मैसेज आया था, जो देखने में बिल्कुल असली लग रहा था। लिंक खोलते ही मोबाइल में तकनीकी गड़बड़ी हुई और कुछ ही देर में खाते से बड़ी रकम कट गई। पुलिस साइबर सेल की मदद से लिंक, मोबाइल नंबर और बैंक ट्रांजेक्शन की जांच कर रही है।
तीन बच्चों के साथ महिला रहस्यमयी तरीके से लापता
बिलासपुर में तीन बच्चों के साथ एक महिला के रहस्यमयी तरीके से लापता होने का मामला सामने आया है। पुष्प नंदिनी कार्णिक बीते सात दिनों से अपने बच्चों के साथ लापता है। महिला मूल रूप से कबीरधाम जिले के पांडा तराई की रहने वाली बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार वह बिलासपुर अपने मायके आने के लिए घर से निकली थी, लेकिन इसके बाद से उसका कोई पता नहीं चल पाया।
महिला के पति ने इस संबंध में सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर महिला और बच्चों की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस आसपास के जिलों और संभावित ठिकानों पर भी पूछताछ कर रही है।
राज्य सरकार की अपील खारिज
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने विवाह का झूठा प्रलोभन देकर दुष्कर्म और अनुसूचित जाति अत्याचार अधिनियम के तहत दर्ज मामले में आरोपी को बरी किए जाने के फैसले को सही ठहराते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी है। यह फैसला न्यायमूर्ति रजनी दुबे और न्यायमूर्ति राधाकिशन अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनाया।
यह आपराधिक अपील राज्य शासन द्वारा विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी अत्याचार), रायपुर के 31 अगस्त 2023 के निर्णय के खिलाफ दायर की गई थी। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी धर्मेंद्र कुमार को अपहरण, दुष्कर्म और एससी-एसटी एक्ट के आरोपों से बरी कर दिया था।
जांच के दौरान पीड़िता का चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया, जिसमें शरीर पर किसी भी प्रकार की अंदरूनी या बाहरी चोट नहीं पाई गई। मेडिकल रिपोर्ट में जबरदस्ती से शारीरिक संबंध होने की पुष्टि नहीं हो सकी। अदालत ने पाया कि पीड़िता आरोपी के साथ अपनी मर्जी से गई थी और दोनों के बीच प्रेम संबंध था।
हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपहरण और दुष्कर्म के आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में विफल रहा। चूंकि मुख्य अपराध सिद्ध नहीं हुआ, इसलिए एससी-एसटी अत्याचार अधिनियम भी लागू नहीं होता। इन्हीं आधारों पर राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी गई।

