नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़े मामलों में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। चैतन्य बघेल को शराब घोटाले के एक मामले में मिली जमानत को चुनौती देने वाली छत्तीसगढ़ सरकार की अपील पर शीर्ष अदालत ने विस्तृत सुनवाई एक सप्ताह बाद करने का फैसला लिया है।
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जीयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ के समक्ष हुई। राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने अदालत को बताया कि चैतन्य बघेल को जमानत मिलने के बाद मामले से जुड़ा एक महत्वपूर्ण गवाह सामने नहीं आ रहा है, जिससे जांच प्रभावित होने की आशंका है। सरकार ने जमानत आदेश पर पुनर्विचार की मांग की।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में एक सप्ताह बाद विस्तार से सुनवाई करेगा। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी 15 जनवरी को इस अपील पर सुनवाई स्थगित की जा चुकी है।
इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने शराब घोटाले से जुड़े एक अन्य मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव रहीं सौम्या चौरसिया की याचिका पर भी सुनवाई की। सौम्या चौरसिया को प्रवर्तन निदेशालय ने दिसंबर 2025 में गिरफ्तार किया था। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि अलग-अलग मामलों में बार-बार एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है और यह छठी बार है जब वे हिरासत में ली गई हैं।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस याचिका पर सीधे सुनवाई करने से इनकार करते हुए सौम्या चौरसिया को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि वे एक सप्ताह के भीतर हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल कर सकती हैं और हाईकोर्ट से अपेक्षा की गई है कि वह प्राथमिकता के आधार पर दो सप्ताह के भीतर इस पर निर्णय ले।
अदालत को यह भी बताया गया कि सौम्या चौरसिया को 2 जनवरी को एक अन्य मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा द्वारा भी गिरफ्तार किया गया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उस मामले में भी वे हाईकोर्ट से ही जमानत की मांग कर सकती हैं।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही कोयला लेवी घोटाले के मामले में सौम्या चौरसिया को जमानत दे चुका है, लेकिन बाद में उन्हें शराब घोटाले से जुड़े मामलों में दोबारा गिरफ्तार किया गया।


