रायपुर। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत संचालित स्व-सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसका प्रेरणादायक उदाहरण सक्ती जिले के जनपद पंचायत डभरा के ग्राम पंचायत डोमनपुर की सखी सहेली महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य रेवती साहू हैं।
इस समूह की अध्यक्ष खिलेश्वरी बरेठ तथा सचिव रेवती साहू हैं। समूह को एनआरएलएम (बिहान) योजना के अंतर्गत आरएफ राशि 15 हजार रुपये और सीआईएफ राशि 60 हजार रुपये की सहायता प्राप्त हुई है। इसके साथ ही बैंक लिंकेज के माध्यम से ऋण सुविधा भी उपलब्ध कराई गई।
स्व-सहायता समूह से जुड़ने से पहले रेवती साहू घरेलू कार्यों तक ही सीमित थीं और उनके पास आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं था। लेकिन समूह की नियमित बैठकों, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन से उन्हें स्वरोजगार की प्रेरणा मिली और उन्होंने आर्थिक गतिविधि शुरू करने का निर्णय लिया।
सेटरिंग प्लेट व्यवसाय से मिली नई पहचान
रेवती साहू ने सबसे पहले सेटरिंग प्लेट व्यवसाय की शुरुआत की। इसके लिए उन्हें एनआरएलएम (बिहान) योजना के तहत बैंक लिंकेज से 1 लाख रुपये और सीआईएफ से 60 हजार रुपये की वित्तीय सहायता मिली।
वित्तीय वर्ष 2025 में उन्हें बैंक लिंकेज के माध्यम से 10 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ, जिसमें से 4 लाख रुपये से सेटरिंग प्लेट सामग्री खरीदकर व्यवसाय का विस्तार किया गया।
वर्तमान में इस व्यवसाय से उन्हें लगभग 3 लाख 60 हजार रुपये की वार्षिक आय हो रही है।
मशरूम उत्पादन से बढ़ी आय
आय के स्रोत को और मजबूत करने के लिए रेवती साहू ने मशरूम उत्पादन का कार्य भी शुरू किया।
वर्तमान में वे प्रतिदिन लगभग 10 किलोग्राम मशरूम का उत्पादन कर आसपास के बाजारों में बेचती हैं। इस कार्य से उन्हें हर साल लगभग 60 से 70 हजार रुपये तक की अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।
अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
रेवती साहू अपनी मेहनत, लगन और एनआरएलएम (बिहान) योजना के सहयोग से आज आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। वे अपने परिवार का सफलतापूर्वक भरण-पोषण कर रही हैं और उनके जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
उनकी सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह उदाहरण दर्शाता है कि स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बनकर “लखपति दीदी” बनने का सपना साकार कर सकती हैं।

