रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सशक्त बनाने की दिशा में प्रदेशभर में विश्व स्तनपान सप्ताह की शुरुआत हो गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सप्ताहभर अस्पतालों, सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों तथा समुदाय स्तर पर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अभियान का उद्देश्य माताओं, गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को स्तनपान के महत्व और उसके वैज्ञानिक लाभों से अवगत कराना है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, शिशु के जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना और पहले छह माह तक केवल मां का दूध पिलाना उसके स्वस्थ विकास की सबसे मजबूत नींव है। मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) नवजात के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच का कार्य करता है, जो संक्रमण से बचाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और कुपोषण के खतरे को कम करने में अहम भूमिका निभाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि छह माह बाद शिशु को उम्र के अनुरूप पूरक आहार शुरू करने के साथ दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखना लाभकारी होता है। इससे बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास को मजबूती मिलती है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, स्तनपान केवल शिशु के लिए ही नहीं बल्कि मां के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद है। इससे प्रसव के बाद मां के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार होता है, कुछ गंभीर बीमारियों का खतरा कम होता है और मां-बच्चे के बीच भावनात्मक संबंध भी मजबूत बनता है।
विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान स्वास्थ्य संस्थानों में काउंसलिंग, समूह चर्चा, स्वास्थ्य शिक्षा सत्र, प्रश्नोत्तर कार्यक्रम और व्यवहारिक प्रशिक्षण आयोजित किए जा रहे हैं। चिकित्सक, स्टाफ नर्स, एएनएम, मितानिन और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता माताओं को सही स्तनपान तकनीक, नवजात की देखभाल और इससे जुड़े सामान्य भ्रमों के वैज्ञानिक समाधान भी बता रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने अपील की है कि स्तनपान को केवल मां की जिम्मेदारी न मानकर पूरे परिवार की साझा जिम्मेदारी समझा जाए। परिवार का सहयोग, सकारात्मक वातावरण और सही जानकारी ही हर नवजात को स्वस्थ जीवन की बेहतर शुरुआत दे सकती है। जनभागीदारी और जागरूकता के माध्यम से कुपोषण मुक्त और स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में यह अभियान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


