रायपुर, 7 अगस्त 2026। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शनी में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने रेशम, हथकरघा, हस्तशिल्प, खादी एवं माटीकला बोर्ड के हितग्राहियों और मेधावी छात्र-छात्राओं को 10 करोड़ 90 लाख रुपये से अधिक की अनुदान एवं पुरस्कार राशि वितरित की।
मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा संघ के नए प्रीमियम हैंडलूम ब्रांड ‘कोशल फैब’ का शुभारंभ किया। उन्होंने ब्रांड के लोगो और कैटलॉग का विमोचन भी किया। इसके साथ ही हथकरघा इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर का शुभारंभ किया गया।
हथकरघा को ‘लोकल टू ग्लोबल’ पहचान दिलाने पर जोर
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों, विशेषकर बुनकरों और शिल्पकारों को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का कोसा, बस्तर की बुनाई और प्रदेश के पारंपरिक हथकरघा उत्पाद देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ के हथकरघा उत्पादों को ‘लोकल टू ग्लोबल’ की नई पहचान दिलाना है। इसके लिए आधुनिक डिजाइन, कौशल उन्नयन, प्रशिक्षण, ब्रांडिंग, विपणन और नए बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।
बुनकरों के लिए सरकार की बड़ी पहल
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में 469 आवासविहीन बुनकर परिवारों के लिए बुनकर शेड सह आवास निर्माण की स्वीकृति दी गई है। इसी अवधि में 47 प्रदर्शनियों के माध्यम से लगभग 10 करोड़ रुपये के हथकरघा उत्पादों की बिक्री हुई।
उन्होंने बताया कि हथकरघा क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका को देखते हुए 2,001 महिला स्व-सहायता समूहों को सिलाई पारिश्रमिक के रूप में 68 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से विभिन्न शासकीय विभागों को 93 करोड़ रुपये के वस्त्र उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं बुनकरों द्वारा निर्मित 436 करोड़ रुपये के वस्त्रों की शासकीय खरीदी की गई है।
छत्तीसगढ़ के हैंडलूम और हस्तशिल्प उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने के लिए देश के पांच प्रमुख हवाई अड्डों पर शोरूम स्थापित किए जा रहे हैं। रायपुर में निर्माणाधीन यूनिटी मॉल भी स्थानीय उत्पादों के लिए आधुनिक विपणन मंच उपलब्ध कराएगा।
नवा रायपुर में गारमेंट यूनिट, 4,500 से अधिक रोजगार के अवसर
मुख्यमंत्री साय ने बताया कि नवा रायपुर में प्रदेश की पहली गारमेंट इकाई स्थापित की जा रही है। इससे 4,500 से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद है। वहीं नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट) की स्थापना से युवाओं को डिजाइन और टेक्सटाइल क्षेत्र में नए अवसर मिलेंगे।
आत्मसमर्पित महिलाओं का रैंप वॉक बना आकर्षण
कार्यक्रम का सबसे खास आकर्षण बस्तर की आत्मसमर्पित नक्सली महिलाओं का रैंप वॉक रहा। स्वदेशी फैशन शो में महिलाओं ने छत्तीसगढ़ के पारंपरिक कोसा सिल्क और अन्य हैंडलूम परिधानों का प्रदर्शन किया।
यह प्रस्तुति मुख्यधारा से जुड़कर आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ रही महिलाओं के आत्मविश्वास और बदलते बस्तर की सकारात्मक तस्वीर के रूप में सामने आई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महिलाओं से आत्मीय संवाद कर उनका उत्साह बढ़ाया और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री ने खरीदी कोसा साड़ी
मुख्यमंत्री साय ने स्वदेशी प्रदर्शनी में विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने कोसा, खादी, हस्तशिल्प, मृद्शिल्प सहित कई पारंपरिक उत्पादों की जानकारी ली और कारीगरों से संवाद किया।
इसी दौरान मुख्यमंत्री ने हथकरघा स्टॉल से तत्काल भुगतान कर कोसा साड़ी खरीदी। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों की खरीद बुनकरों और शिल्पकारों के श्रम एवं कौशल का सम्मान है।
‘कोशल फैब’ से छत्तीसगढ़ के हथकरघा को नई पहचान
‘लूम टू लग्जरी’ की अवधारणा पर आधारित ‘कोशल फैब’ छत्तीसगढ़ के कोसा और पारंपरिक हथकरघा उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
मुख्यमंत्री ने ब्रांड के लोगो और कैटलॉग का विमोचन किया। सरकार का उद्देश्य पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक डिजाइन, बेहतर ब्रांडिंग और व्यापक बाजार से जोड़ना है।
डिजिटल पहल से हथकरघा कारोबार होगा व्यवस्थित
मुख्यमंत्री की उपस्थिति में छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा संघ द्वारा एनआईसी के सहयोग से विकसित इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर भी लॉन्च किया गया।
इससे उत्पादों के भंडारण, प्रबंधन, विपणन और वितरण व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी। कार्यक्रम में पुरस्कृत बुनकरों की डायरेक्टरी और टाई-डाई एवं बांधनी रंगाई विषयक पुस्तक का विमोचन भी किया गया।
935 मेधावी विद्यार्थियों को 81.83 लाख की प्रोत्साहन राशि
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने विभिन्न योजनाओं के तहत हितग्राहियों को अनुदान एवं पुरस्कार राशि वितरित की। कक्षा 10वीं और 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 935 छात्र-छात्राओं को 81.83 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। वहीं 17 वरिष्ठ बुनकरों को सम्मान राशि देकर उनके योगदान का सम्मान किया गया।
इसके अलावा 49 बुनकरों के लिए बुनकर शेड सह आवास निर्माण हेतु 1.22 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति, पांच बुनकर सहकारी समितियों को भवन निर्माण के लिए 75 लाख रुपये की सहायता और 85 बुनकरों को उन्नत करघे एवं सहायक उपकरण वितरित किए गए।
हस्तशिल्प विकास बोर्ड ने 30 शिल्पकारों को आधुनिक टूल किट और माटीकला बोर्ड ने 70 पंजीकृत माटी शिल्पियों को विद्युत चाक प्रदान किए।
‘सेल्फी विद स्वदेशी’ अभियान से जुड़ने की अपील
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों से स्वदेशी उत्पादों को अपनाने और ‘सेल्फी विद स्वदेशी’ अभियान से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों की खरीद बुनकरों, शिल्पकारों और कारीगरों की आजीविका को मजबूत करने के साथ आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी मजबूती देती है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि स्वदेशी उत्पाद खरीदकर उसके साथ सोशल मीडिया पर सेल्फी साझा करने वाले प्रत्येक जिले के चयनित प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया जाएगा।
कार्यक्रम में उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा बुनकर संघ के अध्यक्ष भोजराम देवांगन, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष राकेश पांडेय, छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष शालिनी राजपूत सहित जनप्रतिनिधि, बुनकर, शिल्पकार और बड़ी संख्या में कारीगर मौजूद रहे।


