रायपुर। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए संचालित छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर तैयार कर रहा है। स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन सहित विभिन्न गतिविधियों को अपनाकर अपनी आय बढ़ा रही हैं।
इसी कड़ी में सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड के ग्राम गुमगराखुर्द की रहने वाली श्रीमती जय कुमारी ने निजी भूमि पर तालाब बनाकर मत्स्य पालन को अपनी आजीविका का माध्यम बनाया है। लक्ष्मी स्व-सहायता समूह से जुड़ी जय कुमारी ने विभिन्न आजीविका गतिविधियों के माध्यम से लखपति दीदी के रूप में अपनी पहचान बनाई है।
निजी जमीन पर तालाब, अब मछली पालन से बढ़ेगी आमदनी
जय कुमारी ने अपनी निजी भूमि पर तालाब का निर्माण कराया और इसके बाद उसमें मछली पालन शुरू किया। ‘बिहान’ योजना के माध्यम से उन्हें मछली बीज के लिए सहायता मिल रही है।
इसके अलावा मत्स्य विभाग से 50 प्रतिशत अनुदान पर मछली बीज उपलब्ध होने से उन्हें मत्स्य पालन को आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है।
जय कुमारी बताती हैं कि वे पहले भी मत्स्य पालन कर चुकी हैं। पहले इस गतिविधि से अच्छी आमदनी होने के बाद उनका उत्साह बढ़ा और उन्होंने इसे दोबारा व्यवस्थित तरीके से शुरू करने का निर्णय लिया।
पुराने अनुभव ने दिखाई नई राह
जय कुमारी के लिए मत्स्य पालन केवल आय का साधन नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर भी है। पहले से मिले अनुभव के कारण उन्हें मछली पालन की प्रक्रिया की जानकारी है।
अब वे अपनी निजी भूमि और उपलब्ध जल संसाधन का बेहतर उपयोग करते हुए मत्स्य पालन को अपनी नियमित आजीविका का हिस्सा बना रही हैं। सरकारी सहायता से उनके प्रयासों को और मजबूती मिल रही है।
बिहान योजना से महिलाओं को मिल रहे आजीविका के अवसर
‘बिहान’ योजना के माध्यम से स्व-सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को उनकी रुचि, क्षमता और स्थानीय संसाधनों के अनुसार अलग-अलग आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।
इससे महिलाएं स्वयं रोजगार के अवसर विकसित करने के साथ परिवार की आर्थिक व्यवस्था में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
जय कुमारी की कहानी बताती है कि स्थानीय संसाधन, मेहनत और सरकारी सहयोग मिलकर स्थायी आजीविका का मजबूत आधार तैयार कर सकते हैं।
“बहनों की तरक्की, परिवार की शान—विष्णु भैया का यही अभियान”
अपनी सफलता और शासन से मिले सहयोग के लिए जय कुमारी ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि बिहान योजना के माध्यम से उन्हें मत्स्य पालन के लिए मछली बीज की सहायता मिल रही है, जिससे अपनी आजीविका गतिविधि को आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है।
उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन से उन्हें पहले भी अच्छी आमदनी प्राप्त हुई है और वे भविष्य में इस गतिविधि को और आगे बढ़ाना चाहती हैं।
आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही जय कुमारी
जय कुमारी की कहानी ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार की एक मिसाल बन रही है। निजी जमीन पर तालाब बनाकर शुरू किया गया मत्स्य पालन अब उनके परिवार की आय बढ़ाने का माध्यम बन रहा है।
बिहान योजना और सरकारी सहयोग से मिले अवसरों का उपयोग करते हुए जय कुमारी ने अपने स्थानीय संसाधन को आजीविका में बदल दिया है। उनकी यह पहल ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करती है।


