सारंगढ़, 27 सितंबर 2026। मातृत्व का समय हर महिला के लिए खास होता है, लेकिन दैनिक मजदूरी पर निर्भर परिवारों के लिए इस दौरान आर्थिक चुनौतियां भी बढ़ जाती हैं। सारंगढ़ जिले के ग्राम पठारी की रहने वाली श्रीमती कमला साहू के सामने भी बच्चे के जन्म के बाद ऐसी ही स्थिति उत्पन्न हो गई थी।
कमला साहू रेजा मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करती हैं। नवजात बच्चे की देखभाल के लिए उन्हें कुछ समय के लिए काम से दूर रहना पड़ा, जिससे उनकी दैनिक मजदूरी प्रभावित हो गई। सीमित आय के बीच परिवार के खर्च के साथ नवजात के पोषण और स्वास्थ्य की जरूरतों को पूरा करना उनके लिए चिंता का विषय बन गया था।
मिनीमाता महतारी जतन योजना से मिली 20 हजार की सहायता
ऐसे कठिन समय में ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत श्रम विभाग द्वारा संचालित मिनीमाता महतारी जतन योजना से कमला साहू को आर्थिक सहायता मिली। पात्र हितग्राही के रूप में उनके बैंक खाते में DBT के माध्यम से 20 हजार रुपये की राशि अंतरित की गई।
यह सहायता राशि उनके लिए उस समय आर्थिक संबल बनी, जब मातृत्व के कारण मजदूरी से होने वाली आय प्रभावित हो गई थी। राशि मिलने के बाद कमला अपने नवजात बच्चे के स्वास्थ्य, पोषण और देखभाल पर बेहतर तरीके से ध्यान दे पा रही हैं।
कमला साहू ने बताया- कठिन समय में मिला बड़ा सहारा
कमला साहू ने बताया कि रेजा मजदूरी से मिलने वाली सीमित आय में परिवार की जरूरतें पूरी करना आसान नहीं होता। बच्चे के जन्म के बाद काम पर नहीं जा पाने से घर के खर्च और बच्चे की देखभाल को लेकर चिंता बनी हुई थी। ऐसे समय में मिनीमाता महतारी जतन योजना से मिली 20 हजार रुपये की सहायता उनके परिवार के लिए बड़ा सहारा बनी।
उन्होंने बताया कि इस आर्थिक सहयोग से बच्चे के पोषण और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली है।
योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने पर जोर
कमला साहू की कहानी ‘सेवा संकल्प अभियान’ के उस उद्देश्य को सामने रखती है, जिसके तहत पात्र हितग्राहियों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। आर्थिक सहायता मिलने से कमला को मातृत्व के दौरान परिवार की जरूरतों को संभालने में सहारा मिला है।
सरकारी योजनाओं की ऐसी सहायता जरूरतमंद परिवारों के लिए आर्थिक कठिनाइयों के बीच राहत का माध्यम बन सकती है। कमला साहू के परिवार को भी इस सहायता से बच्चे की देखभाल और भविष्य को लेकर कुछ राहत मिली है।


