रायपुर, 4 अक्टूबर 2026। गांव की सड़क पर दूर से आती बस और उसके हॉर्न की आवाज अब उन ग्रामीण इलाकों में भी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन रही है, जहां कभी बस का आना ही बड़ी बात माना जाता था। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर शुरू हुई मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना ने अपने पहले वर्ष में दूरस्थ अंचलों की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को विस्तार देने में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
4 अक्टूबर 2025 को जगदलपुर से शुरू हुई योजना के प्रथम चरण में बस्तर और सरगुजा संभाग को शामिल किया गया। वर्तमान में 13 जिलों के 106 चयनित मार्गों पर 107 बसें संचालित हो रही हैं। इन बसों के माध्यम से 850 ऐसे गांव पहली बार नियमित यात्री बस सेवा से जुड़े हैं, जहां पहले यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी।
एक साल में 24 लाख किलोमीटर का सफर
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत संचालित 107 बसों ने एक वर्ष में लगभग 24 लाख किलोमीटर की दूरी तय की है। ये बसें प्रतिदिन करीब 17,500 किलोमीटर का सफर कर रही हैं।
इसका सीधा असर ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ा है। अब विद्यार्थी स्कूल तक आसानी से पहुंच पा रहे हैं। अस्पताल, हाट-बाजार, तहसील, ब्लॉक और जिला मुख्यालय तक जाने के लिए ग्रामीणों को पहले की तरह पैदल चलने या निजी वाहनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है।
बस सेवा ने गांवों को केवल शहरों से जोड़ने का काम नहीं किया है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार, रोजगार और प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंच भी आसान की है।
जशपुर की पहाड़ियों में भी बदली तस्वीर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के गृह जिले जशपुर के दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में भी योजना का असर दिखाई दे रहा है। जिले में 16 चयनित मार्गों पर 16 बसें संचालित की जा रही हैं।
बगीचा विकासखंड के सन्ना निवासी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती सुनीता निकुंज बताती हैं कि पहले उन्हें पास के गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र तक पहुंचने के लिए किसी से लिफ्ट मांगनी पड़ती थी। कई बार निजी वाहन का सहारा लेना पड़ता था और वाहन नहीं मिलने पर पैदल जाना पड़ता था।
अब ग्रामीण बस सेवा शुरू होने से उनका आवागमन आसान हुआ है। सुनीता निकुंज के अनुसार, “यह बस मेरे लिए बहुत बढ़िया साधन बन गई है।”
पहले पैदल जाते थे, अब समय पर लौट आते हैं
ग्राम मरंगी निवासी दशरथ भगत भी बस सेवा से हुए बदलाव को महसूस कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले इस सड़क पर बस नहीं चलती थी और जरूरी काम के लिए कई बार पैदल सफर करना पड़ता था।
अब बस शुरू होने से बगीचा तक आना-जाना आसान हो गया है। दशरथ भगत ने कहा, “अब मुख्यमंत्री जी की पहल से बस शुरू हो गई है। हम आसानी से बगीचा जाते हैं और समय पर वापस भी लौट आते हैं।”
यात्री मंगलराम बताते हैं कि पहले छिछली और चंपा जैसे बाजारों तक पैदल जाना पड़ता था। अब बस मिलने से सफर की परेशानी काफी कम हुई है।
सुकमा-बीजापुर के अंदरूनी इलाकों तक पहुंची बस
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना का विस्तार प्रदेश के अत्यंत दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों तक भी किया गया है। सुकमा और बीजापुर के अंदरूनी इलाकों तथा नियद नेल्लानार के गांवों में भी ग्रामीण बसों का संचालन किया जा रहा है।
सुकमा के गोलापल्ली, भेज्जी, किस्ताराम, मिनपा, चिंतलनार, बुरकापाल, चिंतागुफा, कोंटा, पुवर्ती और जगरगुंडा तथा बीजापुर के आवापल्ली, बासागुड़ा, सारकेगुड़ा, पामेड़, भैरमगढ़ और नेलासनार सहित कई दुर्गम क्षेत्रों को नियमित सार्वजनिक परिवहन से जोड़ने की पहल की गई है।
इन क्षेत्रों में बस सेवा ग्रामीणों के लिए हाट-बाजार और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच का नियमित साधन बन रही है।
दुर्गम मार्गों पर बस संचालन के लिए सरकार दे रही वित्तीय सहायता
दूरस्थ और कम यात्री संख्या वाले मार्गों पर भी नियमित बस सेवा जारी रहे, इसके लिए राज्य सरकार बस ऑपरेटरों को वित्तीय सहायता दे रही है।
योजना के तहत:
- पहले वर्ष ₹26 प्रति किलोमीटर सहायता
- दूसरे वर्ष ₹24 प्रति किलोमीटर सहायता
- तीसरे वर्ष ₹22 प्रति किलोमीटर सहायता
का प्रावधान है। यह सहायता तीन वर्ष तक दी जाएगी। इसके अलावा अधिकतम तीन वर्ष तक मासिक मोटरयान कर में छूट का प्रावधान भी किया गया है।
इसका उद्देश्य कम यात्री संख्या वाले दूरस्थ मार्गों पर भी नियमित और निर्बाध बस सेवा बनाए रखना है।
लाइव ट्रैकिंग से लेकर बस संगवारी ऐप तक
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना को तकनीक से भी जोड़ा गया है। बसों की लाइव ट्रैकिंग, ट्रिप, रूट और स्टॉपेज की जानकारी के लिए पोर्टल विकसित किया गया है। परिवहन विभाग के कंट्रोल एवं कमांड सेंटर से बसों की निगरानी की जा रही है।
बस ऑपरेटरों को वित्तीय सहायता का भुगतान भी ऑनलाइन रिपोर्ट के आधार पर किया जा रहा है।
यात्रियों की सुविधा के लिए ‘बस संगवारी’ ऐप के माध्यम से बसों की समय-सारिणी उपलब्ध कराई जा रही है। इससे ग्रामीण परिवहन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने में मदद मिल रही है।
850 गांवों तक पहुंची विकास की नई राह
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना की सफलता को केवल बसों और किलोमीटर के आंकड़ों तक सीमित नहीं किया जा सकता। इसका असर उस विद्यार्थी की सुविधा में दिखाई देता है, जो अब समय पर स्कूल पहुंच सकता है; उस महिला के अनुभव में दिखाई देता है, जिसे काम पर जाने के लिए लिफ्ट का इंतजार नहीं करना पड़ता; और उस ग्रामीण की सुविधा में दिखाई देता है, जो हाट-बाजार या जरूरी काम पूरा कर समय पर अपने गांव लौट सकता है।
850 गांवों का पहली बार नियमित बस सेवा से जुड़ना ग्रामीण कनेक्टिविटी की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। दूरस्थ अंचलों तक पहुंच रही ये बसें गांव और शहर के बीच की दूरी के साथ-साथ सुविधाओं और अवसरों की दूरी भी कम कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के जरिए सार्वजनिक परिवहन को दूरस्थ ग्रामीण जीवन की जरूरतों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बाजार और प्रशासनिक सेवाओं तक लोगों की पहुंच आसान हो रही है।


