रायपुर, 23 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में ग्रामीण महिलाएं रेशम कीट पालन और शहतूत (मल्बरी) ककून उत्पादन के जरिए आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। जिला प्रशासन के प्रयासों से शासकीय रेशम केंद्र में संचालित इस पहल ने महिला स्व-सहायता समूहों की आमदनी बढ़ाने के साथ उनके जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव लाने में मदद की है।
1,775 कृमि अंडों से 733.495 किलो ककून का उत्पादन
वित्तीय वर्ष 2026-27 में शासकीय रेशम केंद्र में मल्बरी कृमिपालन योजना के तहत महिला स्व-सहायता समूह की 12 महिलाओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इस दौरान कुल 1,775 कृमि अंडों के बैच का पालन किया गया, जिससे 733.495 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाले मल्बरी ककून का उत्पादन हुआ।
उत्पादित ककून की बिक्री से समूह को कुल 2 लाख 12 हजार 713 रुपये की आय प्राप्त हुई। इस अतिरिक्त आमदनी से महिलाओं के परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने और आत्मनिर्भरता बढ़ने में मदद मिली है।
वर्षभर रोजगार के अवसर, अगले उत्पादन चरण की तैयारी
रेशम केंद्र में महिलाओं को केवल ककून उत्पादन तक सीमित नहीं रखा गया है। उन्हें केंद्र के रखरखाव और कृषि संबंधी कार्यों, जैसे निंदाई-गुड़ाई, में भी शामिल किया गया है। इससे महिलाओं को वर्षभर रोजगार के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।
रेशम विभाग की आगामी कार्ययोजना के अनुसार, जनवरी-फरवरी 2027 में मल्बरी ककून उत्पादन का अगला चरण प्रस्तावित है। इससे महिला समूहों को आने वाले समय में भी रोजगार और आय के अवसर मिलने की उम्मीद है।
महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूती
नारायणपुर जिले में रेशम उत्पादन की यह पहल महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उदाहरण बन रही है। विभागीय सहयोग और सामूहिक प्रयासों से महिलाएं स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर स्वरोजगार के अवसर विकसित कर रही हैं।
यह पहल ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने और दूसरे स्थानों पर रोजगार के लिए निर्भरता कम करने में भी सहायक हो सकती है।


