बानबरद में पंडवानी महासम्मेलन को संबोधित करते हुए सीएम साय ने की घोषणाएं; तीजन बाई के गृह ग्राम गनियारी को कला ग्राम बनाने और हाईस्कूल का नामकरण करने की पहल
रायपुर, 24 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ की लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने तथा कलाकारों को प्रोत्साहित करने की दिशा में राज्य सरकार महत्वपूर्ण पहल कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस के अवसर पर दुर्ग जिले के अहिवारा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बानबरद में आयोजित पंडवानी महासम्मेलन को संबोधित करते हुए लोककलाओं के संरक्षण, कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने और नई पीढ़ी को सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोककलाएं यहां के इतिहास, जीवन-मूल्यों और सांस्कृतिक पहचान की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। इन्हें सहेजना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रदेशभर से आए लोक कलाकारों का अभिनंदन करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की माटी ने अनेक महान कलाकार दिए हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा और साधना से प्रदेश की लोकसंस्कृति को देश-दुनिया में प्रतिष्ठित किया है।
तीजन बाई के नाम पर शुरू होगा लोककला अलंकरण
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पंडवानी की महान लोक कलाकार पद्म विभूषण तीजन बाई का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी अद्वितीय कला-साधना से छत्तीसगढ़ की पंडवानी को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाई। पंडवानी ऐसी अनूठी लोकविधा है, जिसमें कलाकार गायन, अभिनय और भाव-भंगिमाओं के माध्यम से महाभारत की कथा और उसके पात्रों को जीवंत कर देता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तीजन बाई की स्मृतियों और उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार पहल कर रही है। उनके गृह ग्राम गनियारी को कला ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही वहां के हाईस्कूल का नामकरण तीजन बाई के नाम पर करने की पहल की जाएगी।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि तीजन बाई के नाम पर लोककला अलंकरण इसी वर्ष से राज्योत्सव के अवसर पर प्रदान किया जाएगा। इस अलंकरण का उद्देश्य तीजन बाई की कला-साधना के प्रति सम्मान व्यक्त करने के साथ प्रदेश के लोक कलाकारों को अपनी परंपरागत कलाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करना है।
70 कलाकार दलों को 25-25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि
मुख्यमंत्री साय ने आयोजकों की मांग पर पंडवानी महासम्मेलन में शामिल 70 दलों को 25-25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। इस सहायता के दायरे में पंडवानी कलाकारों के साथ चार पंथी और तीन आदिवासी नृत्य दल भी शामिल हैं। घोषित राशि के अनुसार इन दलों को कुल 17.50 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलेगी।
इस पहल को प्रदेश की पारंपरिक लोककलाओं और कलाकारों को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बानबरद में मिडिल स्कूल बनेगा हाईस्कूल, सड़क निर्माण की घोषणा
मुख्यमंत्री ने क्षेत्र की शिक्षा और अधोसंरचना से जुड़ी मांगों पर भी घोषणाएं कीं। उन्होंने मिडिल स्कूल बानबरद को हाईस्कूल में उन्नयन करने तथा अहिवारा रेलवे क्रॉसिंग से अटल परिसर तक बीटी रोड का निर्माण कराने की घोषणा की।
इन घोषणाओं से क्षेत्र में स्कूली शिक्षा के विस्तार और सड़क संपर्क को बेहतर बनाने की दिशा में काम आगे बढ़ने की उम्मीद है।
46 वर्षों से लोककला संरक्षण में जुटा ज्ञानश्रोत कला मंच
मुख्यमंत्री ने ज्ञानश्रोत कला मंच के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि किसी संस्था का लगातार 46 वर्षों तक लोककला और संस्कृति के संरक्षण के लिए कार्य करना बड़ी उपलब्धि है। मंच ने लोककलाओं को जीवंत रखने, कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने पद्मश्री डॉ. उषा बारले और ज्ञानश्रोत लोककला मंच से जुड़े सभी लोगों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।
छत्तीसगढ़ी सिनेमा को बढ़ावा देने के लिए फिल्म सिटी पर काम
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ के कलाकारों और फिल्म जगत को नई संभावनाओं से जोड़ने के लिए भी प्रयासरत है। छत्तीसगढ़ी सिनेमा और स्थानीय कलाकारों को व्यापक मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ फिल्म विकास बोर्ड का गठन किया गया है। नवा रायपुर में फिल्म सिटी विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से छत्तीसगढ़ी सिनेमा और फिल्म निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ प्रदेश के कलाकारों और युवाओं के लिए रोजगार एवं रचनात्मक अवसरों के नए रास्ते खुल सकते हैं।
लोककलाएं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा: स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव
कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति को आगे बढ़ाने में यहां के कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पंडवानी, पंथी, भरथरी, ददरिया और सुवा जैसी लोकविधाएं प्रदेश के जीवन और सामाजिक परंपराओं का अभिन्न हिस्सा हैं। ये केवल गीत और नृत्य नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा हैं।
उन्होंने कलाकारों से पंडवानी महासम्मेलन की परंपरा को इसी उत्साह के साथ आगे भी जीवंत बनाए रखने का आह्वान किया।
पंडवानी महासम्मेलन के माध्यम से लोककलाओं के संरक्षण, कलाकारों के सम्मान और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया गया। मुख्यमंत्री की घोषणाओं में लोककला अलंकरण, कलाकार दलों के लिए आर्थिक प्रोत्साहन और क्षेत्रीय विकास से जुड़े कार्य प्रमुख रहे।


