राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत मिला ₹30 हजार का अनुदान, ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक अपनाकर प्रति एकड़ 120 क्विंटल टमाटर का उत्पादन
महासमुंद। परंपरागत खेती के साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। इसका उदाहरण महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड के ग्राम कौंसरा निवासी किसान ललित पटेल हैं। उन्होंने उद्यानिकी फसलों की खेती को अपनाकर कृषि को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में प्रयास किया है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत मिले अनुदान और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से उन्हें ग्राफ्टेड टमाटर की खेती में बेहतर उत्पादन और आय प्राप्त करने में मदद मिली है।
1.27 हेक्टेयर सिंचित भूमि पर उगाते हैं सब्जियां
किसान ललित पटेल के पास कुल 1.27 हेक्टेयर कृषि भूमि है, जिसका पूरा रकबा सिंचित है। वे अपने खेत में वर्षभर बैंगन, सेम, भिंडी, बरबटी और अदरक सहित विभिन्न उद्यानिकी फसलों की खेती करते हैं।
ललित पटेल के अनुसार, धान की परंपरागत खेती की तुलना में सब्जियों के उत्पादन से उन्हें बेहतर आमदनी हो रही है। इससे उनकी आय में वृद्धि हुई है और उद्यानिकी फसलों की खेती के प्रति उनका रुझान भी बढ़ा है।
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना से मिला ₹30 हजार का अनुदान
खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए ललित पटेल ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाया। वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत ग्राफ्टेड टमाटर फसल प्रदर्शन घटक के तहत उन्हें एक एकड़ में ग्राफ्टेड टमाटर की खेती के लिए 30 हजार रुपये का अनुदान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से प्रदान किया गया।
उन्होंने टमाटर की खेती में ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और कृषि यंत्रों का उपयोग किया। इन तकनीकों के माध्यम से उन्हें उन्नत पद्धति से सब्जी उत्पादन करने का अवसर मिला।
एक एकड़ में 120 क्विंटल टमाटर का उत्पादन
ललित पटेल ने ग्राफ्टेड टमाटर की खेती से प्रति एकड़ 120 क्विंटल उत्पादन प्राप्त किया। उनके मुताबिक, बाजार में टमाटर का अच्छा मूल्य मिलने से अन्य खर्चों को घटाने के बाद उन्हें एक एकड़ से लगभग 1 लाख 70 हजार रुपये की शुद्ध आय हुई।
आधुनिक कृषि तकनीकों, सिंचाई की बेहतर व्यवस्था और उद्यानिकी फसलों के चयन से उन्हें खेती को अधिक लाभकारी बनाने में मदद मिली है।
दूसरे किसानों को भी कर रहे प्रेरित
ललित पटेल स्वयं उद्यानिकी फसलों की खेती करने के साथ गांव के अन्य किसानों को भी सब्जी उत्पादन अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनकी खेती का अनुभव बताता है कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप फसल चयन, आधुनिक तकनीकों और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर किसान अपनी आय बढ़ाने के अवसर तलाश सकते हैं।


