रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश में संचालित कोचिंग सेंटरों की कार्यप्रणाली को पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। उच्च शिक्षा विभाग ने छत्तीसगढ़ कोचिंग सेंटर (नियंत्रण एवं विनियमन) विधेयक 2026 का प्रारूप तैयार किया है। प्रस्तावित कानून के माध्यम से कोचिंग संस्थानों के संचालन में अनुशासन, गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रावधान किए जाएंगे।
उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार विद्यार्थियों को सुरक्षित, सकारात्मक और तनावमुक्त शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और अभिभावकों के हितों की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है।
मंत्री वर्मा के अनुसार, प्रस्तावित विधेयक से कोचिंग संस्थानों की जवाबदेही बढ़ेगी और विद्यार्थियों को अनावश्यक शैक्षणिक दबाव, मनमानी फीस तथा अन्य समस्याओं से राहत दिलाने में मदद मिलेगी।
20 या अधिक विद्यार्थियों वाले कोचिंग सेंटरों का पंजीकरण होगा अनिवार्य
विधेयक के प्रारूप में 20 अथवा इससे अधिक विद्यार्थियों वाले कोचिंग सेंटरों का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। पंजीकरण की वैधता पांच वर्ष रखने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा शुल्क संबंधी पारदर्शिता, पाठ्यक्रम बीच में छोड़ने पर फीस वापसी और छात्रावासों की सुरक्षा से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं।
विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा पर जोर
प्रस्तावित विधेयक में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए परामर्श व्यवस्था विकसित करने का प्रावधान है। इसके साथ ही उत्पीड़न संबंधी शिकायतों के निराकरण और चौबीसों घंटे हेल्पलाइन की व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है।
इन प्रावधानों का उद्देश्य विद्यार्थियों को सुरक्षित और तनावमुक्त शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराना तथा उनकी समस्याओं का समय पर समाधान सुनिश्चित करना है।
राज्य और जिला स्तर पर बनेंगे प्राधिकरण एवं समितियां
विधेयक के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्यस्तरीय प्राधिकरण तथा जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में जिला समितियों के गठन का प्रस्ताव है।
प्रारूप के अनुसार, नियमों का उल्लंघन करने वाले कोचिंग संस्थानों पर 10 हजार से 5 लाख रुपये तक की शास्ति लगाने का प्रावधान किया गया है। गंभीर मामलों में संस्थान का पंजीकरण निरस्त करने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
सात दिनों में आमंत्रित किए गए सुझाव
उच्च शिक्षा विभाग ने विधेयक के प्रारूप को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनहितकारी बनाने के लिए अभिभावकों, शिक्षाविदों, युवाओं, हितधारकों और आम नागरिकों से सात दिनों के भीतर सुझाव एवं अभिमत आमंत्रित किए हैं।
विभाग के अनुसार, विधेयक का प्रारूप उच्च शिक्षा विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाएगा। इच्छुक नागरिक अपने सुझाव ई-मेल [email protected] पर भेज सकते हैं।
सरकार का उद्देश्य प्राप्त सुझावों और अभिमतों के आधार पर प्रस्तावित विधेयक को अधिक प्रभावी बनाना है, ताकि कोचिंग संस्थानों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आए और विद्यार्थियों के हितों का बेहतर संरक्षण हो सके।

