विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो भविष्य में बिजली दरों में 10 से 20 फीसदी तक की और बढ़ोतरी हो सकती है। इसके चलते बिजली की कीमतें अब पेट्रोल-डीजल की तरह हर महीने घट-बढ़ सकती हैं। उत्तर प्रदेश में करीब पांच वर्षों के बाद बिजली दरों में बढ़ोतरी की गई है। बिजली कंपनियों ने फ्यूल सरचार्ज के तहत 1.24 फीसदी का इजाफ़ा किया है, जो अप्रैल 2025 से लागू हो गई है। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं के है महीने आने वाले बिजली बिलों पर पड़ेगा और उन्हें अब पहले से अधिक भुगतान करना होगा।
इस बढ़ोतरी से बिजली कंपनियों को करीब 79 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होने का अनुमान है।
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) पर पहले से ही 33,122 करोड़ रुपये का उपभोक्ता बकाया है। ऐसे में उत्तर प्रदेश विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने कहा है कि जब कंपनियों के पास उपभोक्ताओं का इतना बकाया है, तो आम जनता पर अतिरिक्त बोझ डालना अनुचित है
उन्होंने यह भी बताया कि अब UPPCL को हर महीने बिजली बिल में फ्यूल सरचार्ज कम या ज्यादा करने की छूट मिल गई है, जो पहले नहीं थी। उनका कहना है कि जनवरी में जो 78.99 करोड़ रुपये का सरचार्ज लगा था, उसे उपभोक्ताओं के पुराने सरप्लस से समायोजित किया जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। परिषद ने इस फैसले का विरोध करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो भविष्य में बिजली दरों में 10 से 20 फीसदी तक की और बढ़ोतरी हो सकती है। इसके चलते बिजली की कीमतें अब पेट्रोल-डीजल की तरह हर महीने घट-बढ़ सकती हैं।

