नई दिल्ली। आज पूरे देश में रोशनी का सबसे बड़ा पर्व दीपावली अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। हर गली, हर घर दीपों की जगमग रोशनी से नहा उठा है। बाजारों में रौनक है, और लोगों में उत्साह चरम पर है। यह पर्व अंधकार पर प्रकाश की विजय, असत्य पर सत्य की जीत और नए आरंभ का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि त्रेता युग में इस दिन भगवान श्रीराम 14 वर्षों का वनवास पूर्ण कर माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे। उनके आगमन पर अयोध्यावासियों ने पूरे नगर को दीपों से सजाया था। तभी से दीपावली पर दीप जलाने की परंपरा चली आ रही है।
इसके अलावा यह भी माना जाता है कि दीपावली की रात्रि को मां लक्ष्मी धन, वैभव और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय मां लक्ष्मी प्रकट हुई थीं और उन्होंने भगवान विष्णु को अपना पति रूप में स्वीकार किया।
इस वर्ष दीपावली के अवसर पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के लिए तीन प्रमुख शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। पूजा के इन मुहूर्तों में मां लक्ष्मी की विधिवत आराधना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। प्रदोष काल शाम 5:46 बजे से रात 8:18 बजे तक और वृषभ काल शाम 7:08 बजे से रात 9:03 बजे तक है वहीं सर्वोत्तम मुहूर्त में वृषभ + प्रदोष काल का संयोग शाम 7:08 बजे से रात 8:18 बजे तक जिसकी कुल अवधि 1 घंटा 11 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह तीसरा मुहूर्त लक्ष्मी पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस समय मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धा, भक्ति और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

