रायपुर। राजधानी में युवा कांग्रेसी नेता राहुल ठाकुर से जुड़े ड्रग्स जांच मामले में पुलिस को कई चौंकाने वाले तथ्य हाथ लगे हैं। जांच में सामने आया है कि जब्त किया गया एमडीएमए (ड्रग्स) पंजाब से रायपुर पहुंचा था। इसकी गुणवत्ता और संरचना की पुष्टि के लिए नमूने फोरेंसिक लैब भेजे गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस की सख्ती के बावजूद रायपुर में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान से लगातार ड्रग्स की आपूर्ति हो रही है। पुलिस ने अलग-अलग तस्कर गिरोहों को चिन्हित किया है और नए गिरोहों के सक्रिय होने की भी जानकारी मिली है। बताया जा रहा है कि जो युवक पहले व्यक्तिगत उपयोग के लिए ड्रग्स मंगाते थे, वे अब इसे अन्य लोगों तक पहुंचाकर आर्थिक लाभ कमा रहे हैं। ऐसे आधा दर्जन से अधिक संदिग्ध तस्करों की पहचान कर ली गई है, जिन पर पुलिस की टीमें निगरानी रखे हुए हैं।
इधर, इस मामले में राहुल ठाकुर से जुड़ी एक युवती और एक युवक को पूछताछ के लिए तलब किया गया था। पूछताछ के बाद दोनों को छोड़ दिया गया। वहीं, राहुल ठाकुर का मोबाइल फोन जांच के लिए लैब भेजा गया है, जिससे चैट और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
पुलिस ने बीते सप्ताह कमलेश अरोड़ा, गगनदीप सिंह, आयुष दुबे और बगेल सिंह को गिरफ्तार किया था। इनके मोबाइल फोन की जांच और पूछताछ के दौरान खुलासा हुआ कि नए साल के जश्न के लिए बड़े पैमाने पर ड्रग्स का ऑर्डर दिया गया था।
जानकारी के अनुसार, 30-31 दिसंबर और 1-2 जनवरी को शहर के आउटर इलाकों में स्थित रिसॉर्ट्स, फार्महाउस और क्लबों में पार्टियां आयोजित की जानी थीं। सेजबहार रोड की कुछ बड़ी कॉलोनियों के घर और फार्महाउस भी टेक्नो पार्टी के लिए बुक किए गए थे, जिनमें चुनिंदा लोगों के शामिल होने की सूचना है।
जांच के दौरान ‘ड्रग्स क्वीन’ के नाम से चर्चित एक युवती के मोबाइल फोन से 310 से अधिक ऐसे लोगों के नंबर मिले हैं, जो कथित रूप से ड्रग्स सेवन से जुड़े बताए जा रहे हैं। इनमें विधायक, नेता, कारोबारी, उद्योगपति और अधिकारी जैसे हाईप्रोफाइल लोग शामिल होने की बात सामने आई है। पुलिस के पास इनकी सूची उपलब्ध है, हालांकि अब तक इन पर कोई प्रत्यक्ष कार्रवाई नहीं की गई है।
सूत्रों का कहना है कि आईजी अमरेश मिश्रा द्वारा ड्रग्स सेवन करने वालों की काउंसलिंग के लिए एक समिति का गठन किया गया था, लेकिन तीन माह बीतने के बाद भी समिति द्वारा एक भी व्यक्ति की काउंसलिंग नहीं की गई है। पुलिस के पास चैट, कॉल डिटेल और ट्रांजेक्शन से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं और जांच जारी है।

