बागबाहरा (महासमुंद)। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में सरकारी धन के उपयोग और परियोजना क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। बागबाहरा ब्लॉक की दरबेकेरा डायवर्सन परियोजना पर पिछले लगभग 10 वर्षों में करीब 90 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन अब तक किसानों के खेतों तक सिंचाई का पानी नहीं पहुंच पाया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कागजों में योजना आगे बढ़ती दिखती है, लेकिन जमीन पर इसका लाभ अभी तक किसानों को नहीं मिल पाया है।
फाइलों में प्रगति, जमीन पर अधूरा प्रोजेक्ट
परियोजना से जुड़े आंकड़ों के अनुसार अब तक विभिन्न चरणों में बड़ी राशि खर्च की जा चुकी है।
| वर्ष | कार्य | अनुमानित खर्च |
|---|---|---|
| 2016-17 | दरबेकेरा डायवर्सन को स्वीकृति | ₹35 करोड़ |
| 2019-20 | प्रभावित किसानों को मुआवजा | ₹40.72 करोड़ |
| 2019-20 | नहर निर्माण के लिए अतिरिक्त स्वीकृति | ₹19 करोड़ |
| कुल | अब तक का खर्च | लगभग ₹90 करोड़ |
हालांकि इतना खर्च होने के बाद भी नहर निर्माण का काम अधूरा है और किसानों को सिंचाई का लाभ नहीं मिल पाया है।
अधूरा नहर नेटवर्क बना बड़ी समस्या
जानकारी के अनुसार इस परियोजना में करीब 18 किलोमीटर लंबी नहर का निर्माण प्रस्तावित था, लेकिन एक दशक बीतने के बाद भी यह कार्य पूरी तरह पूरा नहीं हो सका है। कई स्थानों पर पाइप डालने और निर्माण का काम अभी भी जारी है।
तकनीकी और प्रबंधन से जुड़े सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि डायवर्सन में पानी का ठहराव कुछ महीनों तक ही रहता है, जिससे रबी फसल के लिए इसका उपयोग सीमित हो जाता है।
कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि परियोजना के क्रियान्वयन में प्रशासनिक लापरवाही और निर्माण कार्य की धीमी गति बड़ी वजह रही है।
विभाग का दावा – जल्द पूरा होगा काम
इस संबंध में जल संसाधन विभाग के एसडीओ (बागबाहरा) एफ.के. बढ़ई ने कहा कि नहर निर्माण का काम तेजी से किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि
“पांच स्थानों पर लोहे की पाइप चैन सिस्टम से डाली जा रही है और उम्मीद है कि इस वर्ष किसानों को पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा।”
किसानों की नाराजगी
स्थानीय किसान रामनाथ साहू का कहना है कि पिछले कई वर्षों से केवल सर्वे और कागजी प्रक्रिया चल रही है, लेकिन सिंचाई का लाभ अब तक नहीं मिला।
वहीं किसान नेता ललित ठाकुर ने कहा कि परियोजना में खर्च और परिणाम के बीच बड़ा अंतर है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
जांच और जवाबदेही की उठी मांग
स्थानीय स्तर पर अब इस परियोजना की तकनीकी और वित्तीय जांच कराने की मांग उठ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण और खर्च का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए तो स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

