रायपुर। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अवैध अफीम की खेती के मामले में प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू को निलंबित कर दिया है।
यह कार्रवाई समोदा गांव में सामने आए अफीम की अवैध खेती के मामले में लापरवाही और गलत रिपोर्टिंग के आरोपों के बाद की गई है। यह निर्णय जिला कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देश पर लिया गया।
सात दिन में मांगा गया था स्पष्टीकरण
मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने जांच शुरू की थी। इस दौरान
- कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू
- फसल सर्वेयर शशिकांत साहू
- समोदा गांव की पटवारी अनिता साहू
को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। तीनों अधिकारियों से सात दिनों के भीतर जवाब मांगा गया था।
जांच के दौरान कृषि विभाग की रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई का फैसला लिया।
अफीम की खेती को रिपोर्ट में बताया गया मक्का
जांच में यह खुलासा हुआ कि जिस खेत में अवैध रूप से अफीम की खेती की जा रही थी, उसे कृषि विभाग की रिपोर्ट में मक्का की फसल बताया जा रहा था।
इस गलत रिपोर्टिंग के कारण अवैध खेती लंबे समय तक छिपी रही। प्रशासन को संदेह है कि खेत की वास्तविक स्थिति को जानबूझकर छिपाया गया।
प्रदर्शन प्लॉट के नाम पर मिली सरकारी सहायता
दस्तावेजों की जांच में यह भी सामने आया कि विनायक ताम्रकार के भाई विमल ताम्रकार के खेत को कृषि विस्तार अधिकारी ने मक्का फसल का प्रदर्शन प्लॉट बताकर दर्ज किया था।
जबकि वास्तविकता में उस खेत में धान की खेती की जा रही थी। इस गड़बड़ी के कारण सरकारी प्रोत्साहन राशि भी जारी कर दी गई, जिससे योजनाओं के दुरुपयोग की आशंका सामने आई है।
फर्जी फोटो से की गई रिपोर्टिंग
नियमों के अनुसार प्रदर्शन प्लॉट की तस्वीर उसी किसान के साथ ली जानी चाहिए जिसे योजना का लाभ दिया गया हो।
लेकिन जांच में पाया गया कि रिपोर्ट में एक अन्य किसान को मक्का के खेत के पास खड़ा कर फोटो ली गई और उसे पोर्टल पर अपलोड किया गया।
हैरानी की बात यह भी सामने आई कि जिस खेत को मक्का का प्लॉट बताया गया था, उसके पीछे ही अफीम की अवैध खेती हो रही थी।
अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच
प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच जारी रखी है।
अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


