रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में प्रारंभिक बाल शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में बस्तर जिले के ग्राम पंचायत पिपलावंड के मारीपारा आंगनबाड़ी केंद्र ने गुणवत्ता, नवाचार और सामुदायिक भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित यह केंद्र अब केवल पोषण और देखभाल तक सीमित नहीं, बल्कि बच्चों के लिए आकर्षक एवं गतिविधि आधारित प्रारंभिक शिक्षा का प्रभावी माध्यम बन गया है।
पहले यह आंगनबाड़ी केंद्र जर्जर भवन में संचालित होता था, जहां बच्चों को पढ़ाई और अन्य गतिविधियों में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। ग्राम पंचायत की पहल पर जनपद पंचायत बस्तर के माध्यम से नए भवन की स्वीकृति मिली। वर्ष 2024-25 में 11.69 लाख रुपये की लागत से भवन का निर्माण कराया गया। इसमें मनरेगा से 8 लाख रुपये, महिला एवं बाल विकास विभाग से 2 लाख रुपये तथा गौड़ खनिज मद से 1.69 लाख रुपये की राशि खर्च की गई।
नवनिर्मित भवन को बच्चों के अनुकूल और शिक्षण-सहायक स्वरूप दिया गया है। बाहरी दीवारों पर हिंदी वर्णमाला, अंग्रेजी अक्षर, अल्फाबेट ट्री, शैक्षणिक चित्र और आकर्षक भित्ति चित्र बनाए गए हैं, जिससे बच्चे खेल-खेल में सीखने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
केंद्र के भीतर भी सीखने का अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। यहां सचित्र हिंदी वर्णमाला, अंग्रेजी अल्फाबेट, 1 से 100 तक की संख्या तालिका, ग्रोथ ट्री और अन्य इंटरैक्टिव शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई गई है। वर्तमान में केंद्र में 22 बच्चे पंजीकृत हैं, जो प्रतिदिन शिक्षा और पोषण सेवाओं का लाभ ले रहे हैं।
यह आंगनबाड़ी केंद्र सामुदायिक सहभागिता का भी सफल उदाहरण बनकर उभरा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों को गतिविधि आधारित शिक्षा प्रदान कर रही हैं, वहीं स्थानीय ग्रामीण और समुदाय केंद्र के संचालन एवं रखरखाव में सक्रिय सहयोग देकर इसे आदर्श आंगनबाड़ी के रूप में विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।


