रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित महतारी वंदन योजना छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल बनकर उभरी है। योजना के तहत हर महीने मिलने वाली 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता अब केवल घरेलू खर्च का सहारा नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास, आर्थिक स्वतंत्रता, सम्मान और स्वरोजगार का मजबूत आधार बन चुकी है। प्रदेश के ग्रामीण, वनांचल और दूरस्थ क्षेत्रों की लाखों महिलाएं इस योजना से आत्मनिर्भर बनते हुए परिवार की आर्थिक मजबूती में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
योजना की शुरुआत से अब तक 29 किस्तों के माध्यम से 18,805 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में अंतरित की जा चुकी है। राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए 8,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिससे महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को और मजबूती मिलेगी।
मसपुर की माहरी उसेंडी के जीवन में आया बदलाव
नारायणपुर जिले के सुदूर गांव मसपुर की रहने वाली श्रीमती माहरी उसेंडी बताती हैं कि पहले सीमित आय के कारण परिवार का खर्च चलाना मुश्किल होता था और छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित सहायता ने उनके जीवन में नया आत्मविश्वास पैदा किया है। अब वे बच्चों की पढ़ाई, राशन और घरेलू खर्च स्वयं वहन कर रही हैं।
स्वरोजगार की ताकत बनी योजना
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के रामगढ़ गांव की श्रीमती केजू बाई सलामे ने इस राशि को स्वरोजगार का आधार बना लिया है। बिहान के रोशनी स्व-सहायता समूह से जुड़ी केजू बाई हर महीने अपनी किराना दुकान के लिए आवश्यक सामान खरीदती हैं। इससे उनकी बिक्री और आय दोनों में वृद्धि हुई है। वे अब ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं और अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
घरेलू जरूरतों में मिली आर्थिक मजबूती
मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के भल्लौर गांव की श्रीमती संतोषी को योजना के तहत अब तक 29 हजार रुपये की सहायता मिल चुकी है। वे इस राशि का उपयोग राशन, सब्जी और अन्य घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति में करती हैं। उनका कहना है कि अब छोटी-छोटी जरूरतों के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और परिवार में उनकी भूमिका पहले से अधिक मजबूत हुई है।
महतारी वंदन योजना आज प्रदेशभर में महिलाओं के लिए आर्थिक सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता का प्रभावी माध्यम बन चुकी है। नियमित आर्थिक सहायता से महिलाएं न केवल परिवार की जरूरतों में सहयोग कर रही हैं, बल्कि बचत, छोटे व्यवसाय और स्वरोजगार की दिशा में भी आगे बढ़ रही हैं। यह योजना छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण और समावेशी विकास का एक सफल मॉडल बनकर उभर रही है।


