कांकेर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में तीन ग्रामीणों की जान लेने वाली मादा भालू की इलाज के दौरान मौत हो गई है। वन विभाग ने भालू को बेहोश कर रायपुर लाकर उपचार शुरू किया था, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। हालांकि, उसकी मौत के कारणों का अभी खुलासा नहीं हुआ है। मामले की पुष्टि वन विभाग के अधिकारियों ने की है।
नर भालू पहुंचा गांव
मादा भालू की मौत के बाद अब एक नर भालू के गांव में घुसने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। बताया जा रहा है कि बीती रात भालू ने कई घरों के दरवाजे तोड़ने की कोशिश की।
घटना में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई, लेकिन ग्रामीणों ने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। लोग खेतों में जाने और बच्चों को स्कूल भेजने से भी बच रहे हैं।
3 ग्रामीणों की गई थी जान
5 अगस्त को नरहरपुर वन परिक्षेत्र के लारगांव मरकाटोला गांव में एक मादा भालू ने खेत में काम कर रहे ग्रामीणों पर हमला कर दिया था। इस हमले में तीन लोगों की मौत हो गई थी।
घटना में एक अन्य ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हुआ, जिसका रायपुर के अस्पताल में इलाज चल रहा है। घटना के बाद वन विभाग ने मादा भालू को पकड़कर उपचार के लिए रायपुर भेजा था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
ग्रामीणों ने स्कूल में लगाया ताला
भालुओं के लगातार बढ़ते खतरे को देखते हुए ग्रामीणों ने गांव के स्कूल में ताला लगाकर प्रदर्शन शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल पहाड़ी के पास स्थित है और वहां बाउंड्रीवॉल नहीं होने से बच्चों की सुरक्षा खतरे में है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से भालुओं को क्षेत्र से हटाने और स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
सुरक्षा होने तक स्कूल नहीं खोलने की चेतावनी
गांव की उपसरपंच रितिका दिवाकर ने कहा कि जब तक स्कूल में बाउंड्रीवॉल का निर्माण नहीं होता और भालुओं को क्षेत्र से नहीं हटाया जाता, तब तक बच्चे स्कूल नहीं जाएंगे।
उन्होंने बताया कि ग्रामीण लंबे समय से स्कूल में बाउंड्रीवॉल की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कार्रवाई नहीं हुई है।


