रायपुर, 11 अगस्त 2026। बस्तर में मलेरिया के खिलाफ लड़ाई अब सिर्फ दवा और जांच तक सीमित नहीं रही है। जंगलों के बीच बसे गांवों में मच्छरदानी के नियमित उपयोग, बुखार होने पर तत्काल जांच और समय पर इलाज का संदेश धीरे-धीरे लोगों की जीवनशैली का हिस्सा बन रहा है। कभी मलेरिया के लिए संवेदनशील माने जाने वाले इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग ने बीमारी से लड़ने के साथ-साथ लोगों की सोच और व्यवहार में बदलाव को भी अभियान का अहम हिस्सा बनाया है। इसी सामूहिक प्रयास का असर है कि पिछले 10 वर्षों में मलेरिया के मामलों में करीब 83 प्रतिशत की कमी आई है।
बस्तर की तस्वीर बदलने के पीछे वर्षों से चल रही वह मुहिम है, जिसमें स्वास्थ्य सेवाओं को गांवों तक पहुंचाने के साथ लोगों को बीमारी से बचाव के उपाय भी समझाए गए। संभाग की बड़ी जनजातीय आबादी तक प्रभावी ढंग से पहुंचने के लिए स्थानीय भाषा, स्थानीय परंपराओं और समुदाय में प्रभाव रखने वाले लोगों को जागरूकता अभियान से जोड़ा गया। इसका उद्देश्य मलेरिया से बचाव की जानकारी को ऐसी भाषा और शैली में लोगों तक पहुंचाना रहा, जिसे गांव का हर परिवार आसानी से समझ सके और अपनी दिनचर्या में अपना सके।
इसी सोच के साथ बैगा-गुनिया सिरहा सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। गांवों में जिन लोगों की बात समुदाय सहजता से सुनता है, उन्हें मलेरिया से बचाव के उपायों से जोड़ा जा रहा है। इन सम्मेलनों में स्थानीय भाषा और संवाद शैली के माध्यम से मच्छरदानी के नियमित उपयोग, बुखार होने पर तत्काल जांच और डॉक्टर से उपचार लेने की आवश्यकता समझाई जाती है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को विशेष रूप से यह संदेश दिया जा रहा है कि बुखार को मामूली समझकर घर पर इंतजार करना भारी पड़ सकता है। समय पर जांच होने से बीमारी की पहचान जल्द हो सकती है और उपचार शुरू किया जा सकता है। वहीं सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल मलेरिया से बचाव का आसान और प्रभावी उपाय बताया जा रहा है।
मैदानी स्वास्थ्य कार्यकर्ता और मितानिनें भी परिवारों से लगातार संपर्क कर रही हैं। उनका जोर इस बात पर है कि मच्छरदानी केवल घर में रखी न रहे, बल्कि रात में उसका नियमित उपयोग भी किया जाए। मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में बुखार की निगरानी और जांच की व्यवस्था को भी लगातार मजबूत किया गया है।
गांवों में लोगों को समझाया जा रहा है कि बुखार आने पर घरेलू उपचार के भरोसे रहने के बजाय स्वास्थ्य कार्यकर्ता से संपर्क करें और जांच कराएं। इस तरह मलेरिया से बचाव और उपचार दोनों को समुदाय की दिनचर्या और व्यवहार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। बस्तर में स्थानीय समुदाय, बैगा-गुनिया, मितानिन और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की भागीदारी से मलेरिया नियंत्रण की दिशा में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।


