रायपुर, सितंबर 2026। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के तहत संचालित इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर योजना छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं के लिए स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता का प्रभावी माध्यम बन रही है। दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा और दंतेवाड़ा विकासखंडों में पिछले डेढ़ वर्षों से संचालित इस योजना के माध्यम से करीब 2,200 परिवारों को आजीविका के नए साधनों से जोड़ा जा चुका है।
हिम्मत और मेहनत से रामबती ने हासिल की सफलता
कुआकोंडा विकासखंड के ग्राम मुड़ापारा की निवासी रामबती नाग ने बिहान योजना का लाभ लेकर मुर्गी पालन शुरू किया। जिला प्रशासन के सहयोग से उन्हें जून माह में ₹80 प्रति चूजे की दर से 100 चूजे और दाना उपलब्ध कराया गया था।
मुर्गी पालन की शुरुआत में बीमारी के कारण करीब 25 से 30 चूजों की मौत हो गई। इससे रामबती को नुकसान जरूर हुआ, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। बचे हुए चूजों का बेहतर रखरखाव और देखभाल करते हुए उन्होंने अब तक करीब 25 हजार रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर ली है।
रामबती तैयार मुर्गों को करीब ₹500 प्रति किलो की दर से बेचती हैं। उनके मुर्गों का औसत वजन 1 से 3 किलोग्राम तक है।
ब्रुडिंग केंद्रों से महिलाओं को दोहरा लाभ
योजना के तहत क्लस्टर स्तर पर महिलाओं को उद्यमी के रूप में तैयार करने के लिए विशेष पहल शुरू की गई है। महिला उद्यमी बाहर से क्रॉस असील प्रजाति के जीरो-डे चूजे लाती हैं और ब्रुडिंग केंद्र में करीब 15 दिनों तक उनका पालन-पोषण करती हैं।
इसके बाद स्वस्थ चूजों को समूह की अन्य महिलाओं को सौंप दिया जाता है। इस व्यवस्था से चूजे तैयार करने वाली महिला उद्यमी और उनका पालन करने वाली महिला, दोनों को आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है।
450 से अधिक महिलाएं मुर्गी पालन से जुड़ीं
दंतेवाड़ा जिले के विभिन्न क्लस्टरों में अब तक करीब 450 ग्रामीण महिलाओं को मुर्गी पालन गतिविधि से जोड़ा गया है। महिलाओं को उनकी क्षमता और आवश्यकता के अनुसार 50 से 100 चूजे उपलब्ध कराए जाते हैं।
बिहान योजना की यह पहल महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार और नियमित आय का अवसर उपलब्ध करा रही है। रामबती नाग जैसी महिलाओं की सफलता से अन्य ग्रामीण महिलाओं में भी आत्मविश्वास बढ़ रहा है और वे आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।


