छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ‘साइबर जागृति अभियान’ को आगे बढ़ाते हुए पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किए गए 9 मॉड्यूल वाले वीडियो पाठ्यक्रम ‘साइबर संकल्प’ का शुभारंभ किया।
सरल भाषा में मिलेगी डिजिटल सुरक्षा की जानकारी
विजय शर्मा ने कहा कि बैंकिंग, खरीदारी, शिक्षा, व्यापार और सरकारी सेवाओं समेत कई काम अब ऑनलाइन हो रहे हैं। डिजिटल सुविधाओं ने जीवन को आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ साइबर अपराधों की नई चुनौतियां भी सामने आई हैं।
‘साइबर संकल्प’ के तहत तैयार किए गए प्रत्येक वीडियो मॉड्यूल की अवधि करीब 5 से 6 मिनट है। इनमें साइबर ठगी के नए तरीकों, डिजिटल सुरक्षा और अपराधों से बचाव के व्यावहारिक उपायों की जानकारी सरल भाषा में दी जाएगी।
डिजिटल क्रांति के साथ सुरक्षा भी जरूरी
विद्यार्थियों से संवाद करते हुए गृहमंत्री ने कहा कि डिजिटल लेनदेन और डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में तकनीक का इस्तेमाल करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सतर्क और जागरूक रहना जरूरी है।
उन्होंने विद्यार्थियों से स्वयं साइबर सुरक्षा के उपाय सीखने और अपने परिवार, मित्रों तथा समाज के लोगों को जागरूक करने की अपील की। साथ ही साइबर जागरूकता को गांव-गांव तक पहुंचाने का आह्वान किया।
ठगी होते ही 1930 पर करें कॉल
विजय शर्मा ने साइबर धोखाधड़ी होने पर तत्काल कार्रवाई को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन ठगी होने पर घबराने या देर करने के बजाय तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि साइबर अपराध में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। समय पर सूचना मिलने से पुलिस को ठगी की राशि रोकने और पीड़ित तक वापस पहुंचाने की कार्रवाई में मदद मिल सकती है।
‘गोल्डन ऑवर’ में मिली 60 लाख की रकम वापस
कार्यक्रम में साइबर अपराध से पीड़ित लोगों ने अपने अनुभव भी साझा किए। एक करोड़ रुपये से अधिक की साइबर धोखाधड़ी के शिकार डॉ. सेन ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर हुई ठगी की आपबीती बताई।
उन्होंने समय रहते पुलिस से संपर्क किया। जानकारी के अनुसार गोल्डन ऑवर में पुलिस को सूचना मिलने के कारण ठगी की गई 60 लाख रुपये की राशि वापस प्राप्त हो सकी। इस अनुभव से विद्यार्थियों को साइबर ठगी के बाद तत्काल पुलिस या 1930 पर सूचना देने के महत्व की जानकारी मिली।
विद्यार्थियों से साइबर जागरूकता के दूत बनने की अपील
गृहमंत्री ने युवाओं से साइबर सुरक्षा अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग तकनीक का अधिक उपयोग करता है और डिजिटल जागरूकता को समाज के बड़े वर्ग तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से बुजुर्गों, माता-पिता और अन्य परिजनों को फर्जी कॉल, OTP, बैंकिंग फ्रॉड, फर्जी लिंक, सोशल मीडिया ठगी और डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने को कहा।
साइबर क्राइम वालंटियर बनने का आह्वान
कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्रालय और इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) की साइबर क्राइम वालंटियर पहल की जानकारी भी दी गई। इसके माध्यम से नागरिक साइबर अपराधों की रोकथाम में जनभागीदारी के जरिए योगदान दे सकते हैं।
विद्यार्थियों से भी इस पहल से जुड़कर अपने परिवार और समाज को सुरक्षित बनाने में योगदान देने की अपील की गई।
500 से अधिक विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में विश्वविद्यालय और रायपुर के विभिन्न महाविद्यालयों के 500 से अधिक विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। विद्यार्थियों ने विजय शर्मा के साथ साइबर धोखाधड़ी, डिजिटल सुरक्षा, अपराधों की रोकथाम और पुलिस कार्रवाई से जुड़े विषयों पर संवाद किया।
कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (गुप्तवार्ता) अमित कुमार, पुलिस आयुक्त रायपुर डॉ. संजीव शुक्ला, पुलिस महानिरीक्षक (तकनीकी सेवाएं) प्रशांत अग्रवाल, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अमित तुकाराम कांबले, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला एवं कुलसचिव शैलेंद्र पटेल सहित पुलिस और विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक साइबर जागृति अभियान
छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक ‘साइबर जागृति अभियान’ चलाया जा रहा है। अभियान के माध्यम से प्रदेशवासियों को साइबर अपराधों के विभिन्न स्वरूपों, उनसे बचाव के तरीकों और साइबर ठगी होने पर तत्काल उठाए जाने वाले कदमों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।


