रायपुर, 23 सितंबर 2026। दंतेवाड़ा जिले के बचेली निवासी कुमारी के लिए स्मार्टफोन खरीदना कभी आसान नहीं था। सरकारी योजनाओं और जरूरी जानकारी हासिल करने के लिए उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। महतारी वंदन योजना के तहत हर माह मिलने वाली सहायता राशि में से कुछ हिस्सा नियमित रूप से बचाकर उन्होंने अपने लिए स्मार्टफोन खरीदा।
अब यही स्मार्टफोन उनके लिए जानकारी और डिजिटल सेवाओं तक पहुंच का माध्यम बन गया है। वे मोबाइल के जरिए नई-नई जानकारियां हासिल करती हैं और उन्हें आसपास के लोगों के साथ भी साझा करती हैं।
हर महीने थोड़ी-थोड़ी बचत से खरीदा स्मार्टफोन
सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण कुमारी के लिए नया फोन खरीदना मुश्किल था। महतारी वंदन योजना की सहायता राशि मिलने के बाद उन्होंने उसमें से थोड़ी-थोड़ी रकम बचाना शुरू किया।
कुछ महीनों में पर्याप्त राशि जमा होने के बाद उन्होंने स्मार्टफोन खरीदा। इसके बाद उन्होंने मोबाइल का इस्तेमाल करना सीखा और धीरे-धीरे डिजिटल माध्यमों से जानकारी हासिल करने लगीं।
अब सरकारी योजनाओं की जानकारी खुद जुटाती हैं
स्मार्टफोन मिलने के बाद कुमारी अब देश-दुनिया की खबरों के साथ-साथ सरकारी योजनाओं और डिजिटल सेवाओं से जुड़ी जानकारी भी मोबाइल के माध्यम से हासिल करती हैं।
पहले जिन जानकारियों के लिए उन्हें दूसरों की मदद लेनी पड़ती थी, अब उन्हें स्वयं खोजने का अवसर मिल रहा है। इससे उनकी डिजिटल जानकारी और आत्मनिर्भरता में भी बढ़ोतरी हुई है।
बुजुर्गों की जानकारी जुटाने में भी करती हैं मदद
कुमारी का स्मार्टफोन अब केवल उनकी व्यक्तिगत जरूरत तक सीमित नहीं है। वे आसपास रहने वाले लोगों, विशेषकर बुजुर्गों को भी जरूरत पड़ने पर जानकारी खोजने में मदद करती हैं।
किसी सरकारी योजना से जुड़ी जानकारी हो या कोई अन्य जरूरी सूचना, वे मोबाइल के माध्यम से उसे खोजकर लोगों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं।
महतारी वंदन योजना से मिलने वाली सहायता राशि में से की गई छोटी-छोटी बचत से खरीदा गया स्मार्टफोन अब कुमारी के लिए जानकारी, डिजिटल सेवाओं और दूसरों की मदद का माध्यम बन गया है। उनकी कहानी यह दिखाती है कि आर्थिक सहायता का उपयोग व्यक्ति अपनी जरूरत के अनुसार किस तरह किसी उपयोगी संसाधन में बदल सकता है।


