रायपुर, 3 नवंबर 2026। छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रदर्शनी ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और नवाचारों का आकर्षक केंद्र बनी। विभाग की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से गांवों में हो रहे बदलाव और ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता को प्रदर्शित करने वाली इस प्रदर्शनी को द्वितीय पुरस्कार मिला।
प्रदर्शनी में बिहान स्व-सहायता समूहों की महिलाओं के हुनर से तैयार ‘छत्तीसकला’ ब्रांड के उत्पादों से लेकर धमतरी जिले की पीएम जनमन आवास कॉलोनी के मॉडल, अपशिष्ट प्लास्टिक से सड़क निर्माण और सौर ऊर्जा आधारित ‘सोलर दीदी’ जैसी पहलों को प्रदर्शित किया गया।
‘छत्तीसकला’ से बिहान की दीदियों को मिली नई पहचान
प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ की पहल ‘छत्तीसकला’ विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इसके तहत स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार स्थानीय और पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक ब्रांडिंग एवं आकर्षक पैकेजिंग के साथ प्रस्तुत किया गया।
स्टॉल पर जेराफूल चावल, मिलेट आधारित खाद्य पदार्थ, तिखुर पाउडर, सत्तू लड्डू सहित विभिन्न खाद्य उत्पादों, हस्तशिल्प और सजावटी सामग्रियों का प्रदर्शन एवं विक्रय किया गया। खास बात यह रही कि बिहान की दीदियों ने स्वयं स्टॉल का संचालन किया और आगंतुकों को अपने उत्पादों तथा उद्यमिता के बारे में जानकारी दी।
‘छत्तीसकला’ के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के कौशल और परिश्रम को बाजार से जोड़ने की पहल महिला सशक्तिकरण का उदाहरण बनी।
पीएम जनमन आवास कॉलोनी के मॉडल ने खींचा ध्यान
धमतरी जिले के मसान डबरा में विकसित पीएम जनमन आवास कॉलोनी का मॉडल भी प्रदर्शनी में आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। इसमें सुव्यवस्थित आवासों, स्वच्छ एवं हरित परिसर, बुनियादी सुविधाओं और सामुदायिक विकास की अवधारणा को दर्शाया गया।
मॉडल के माध्यम से बताया गया कि प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के तहत विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के परिवारों को पक्के आवास और बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।
अपशिष्ट प्लास्टिक से बनी 12 किलोमीटर सड़कें
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ग्रामीण सड़कों के निर्माण में अपशिष्ट प्लास्टिक का उपयोग भी प्रदर्शनी का महत्वपूर्ण नवाचार रहा। विभाग के अनुसार, प्रदेश के चार जिलों में कुल 7,900 किलोग्राम यानी 7.9 टन अपशिष्ट प्लास्टिक का उपयोग कर 12 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया गया है।
जिलावार स्थिति इस प्रकार है:
- बस्तर: 400 किलोग्राम प्लास्टिक से 1.5 किलोमीटर सड़क।
- महासमुंद: 3,700 किलोग्राम प्लास्टिक से 5 किलोमीटर सड़क।
- सरगुजा: 550 किलोग्राम प्लास्टिक से 1.5 किलोमीटर सड़क।
- मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर: 3,250 किलोग्राम प्लास्टिक से 4 किलोमीटर सड़क।
इस पहल से प्लास्टिक कचरे का उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल करने के साथ पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण सड़क अधोसंरचना को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया।
‘दीदी के गोठ’ की सफलता की नायिकाओं से हुआ सीधा संवाद
बिहान के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘दीदी के गोठ’ के अब तक प्रसारित सभी 15 एपिसोड भी प्रदर्शनी में प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम में जिन ग्रामीण महिलाओं की सफलता की कहानियां प्रसारित हुई हैं, उनमें से कई दीदियों ने स्वयं प्रदर्शनी में पहुंचकर आगंतुकों से संवाद किया।
उन्होंने अपने संघर्ष, स्वरोजगार, आजीविका गतिविधियों और आर्थिक आत्मनिर्भरता की यात्रा साझा की। इस तरह ‘दीदियों की कहानी, उन्हीं की जुबानी’ की अवधारणा को राज्योत्सव में जीवंत रूप मिला।
वीबी-जी राम जी से जल संरक्षण और आजीविका संवर्धन की झलक
प्रदर्शनी में विकसित भारत रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी राम जी के अंतर्गत ग्रामीण विकास से जुड़ी गतिविधियों को आकर्षक मॉडलों के माध्यम से दर्शाया गया।
इसमें जल सुरक्षा एवं संरक्षण, मूल ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका संवर्धन अवसंरचना और आपदा प्रबंधन सहित कुल 375 अनुमेय कार्यों की जानकारी दी गई।
प्रदर्शनी में जल संरक्षण के लिए डिफंक्ट बोरवेल रिचार्ज पिट, ‘मेरी बेटी मेरा अभिमान’ के तहत बालिका शौचालय, आजीविका संवर्धन के लिए बकरी पालन और वन सुरक्षा एवं संरक्षण के मॉडल शामिल किए गए। इन मॉडलों के माध्यम से भूजल पुनर्भरण, बालिकाओं की स्वच्छता एवं गरिमा, ग्रामीण आजीविका और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।
‘सोलर दीदी’ से स्वच्छ ऊर्जा और महिला आत्मनिर्भरता को बढ़ावा
द्वीप्ती योजना और प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से जुड़ी ‘सोलर दीदी’ पहल को भी प्रदर्शनी में प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। इसके माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को सौर ऊर्जा आधारित उद्यमिता से जोड़ने के प्रयासों और उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता की संभावनाओं को तस्वीरों एवं जानकारियों के जरिए दर्शाया गया।
नवाचार और आत्मनिर्भरता के केंद्र बन रहे गांव
राज्योत्सव में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रदर्शनी ने ग्रामीण विकास की बदलती तस्वीर प्रस्तुत की। एक ओर पीएम जनमन आवास कॉलोनी के माध्यम से जनजातीय परिवारों के बेहतर जीवन की झलक दिखाई गई, तो दूसरी ओर ‘छत्तीसकला’ के जरिए ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को बाजार से जोड़ने की पहल सामने आई।
वहीं, अपशिष्ट प्लास्टिक से सड़क निर्माण, जल संरक्षण, बकरी पालन और सौर ऊर्जा जैसे नवाचारों ने पर्यावरण के अनुकूल विकास की दिशा को रेखांकित किया। इन्हीं प्रयासों और योजनाओं की प्रभावशाली प्रस्तुति के लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रदर्शनी को राज्योत्सव में द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया।

