इस्लामाबाद। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए दुर्दांत आतंकी हमले और इस हमले में 26 पर्यटकों की मौत के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव अपने चरम पर है। बताया जा रहा है कि तमाम तरह के प्रतिबंधों के बाद अब भारत कभी भी पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है, यानी युद्ध की शुरुआत हो सकती है। इसकी पुष्टि खुद पाकिस्तान के कई नेता कर चुके हैं। जाहिर है पाकिस्तान को भारत के सैन्य ताकत का पूरा अहसास है, और वह जानते है कि अगर आज की तारीख में युद्ध हुआ तो पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ेगी।
बहरहाल पाक के नेता एक तरफ जहाँ हर दिन भारत के खिलाफ बयानबाजी कर उकसावे की सियासत कर रहे है तो दूसरी तरफ पाकिस्तान की सेना में भारत के संभावित हमले का खौफ साफ़ नजर आ रहा है। भारत ने पाकिस्तान को हर मोर्चे पर मुहतोड़ जवाब देने और पहलगाम में बेगुनाहों को मौत देने वाले आतंकियों को मिट्टी में मिलाने का संकल्प लिया है। भारत के इस चेतावनी के बाद से पाक सेना के तीन मेजर जनरल समेत करीब 63 अफसर सेना से इस्तीफ़ा दे चुके है। बताया जा रहा है कि सेना के कई बड़े अफसरों ने मुल्क भी छोड़ दिया है। इस्तीफ़ा देने वालों में ज्यादातर अफसर वह है जो फ्रंटलाइन पर तैनात रहे है। हालांकि पाक की तरफ से इसकी पुष्टि नहीं की गई है लेकिन उनकी ओर से हर दिन गीदड़भभकी दी जा रही है।
भारत-पाकिस्तान युद्ध के बीच एक और बड़ी खबर निकलकर सामने आई है। एक तरफ जहां पाकिस्तान के आम लोगों में युद्ध का खौफ और दहशत देखा जा रहा है तो दूसरी और नेताओं ने 140 प्रतिशत तक अपनी वेतन में वृद्धि कर ली है।
मिली जानकारी के मुताबिक, यूनियन मिनिस्टर्स का मासिक वेतन अब संसद सदस्यों के बराबर कर दिया गया है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने वेतन, भत्ते और विशेषाधिकार अधिनियम 1975 में संशोधन करने वाला एक अध्यादेश जारी किया है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सांसदों के लिए वेतन वृद्धि को मंजूरी दी है, जो नए साल से प्रभावी होगी। एक संसद सदस्य को अब पहले से कहीं अधिक वेतन मिलेगा। हालांकि, नेशनल असेंबली के स्पीकर अयाज सादिक को बिना किसी बढ़ोतरी के पूर्ववत वेतन मिलता रहेगा। इसी तरह डिप्टी स्पीकर का वेतन भी अपरिवर्तित रहेगा।
सूत्रों के अनुसार, सांसदों के वेतन में बदलाव करने के लिए अधिकृत वित्त समिति ने इस वृद्धि को मंजूरी दी थी। प्रधानमंत्री की मंजूरी के बाद समिति ने वेतन वृद्धि को लागू कर दिया है, जो अब सांसदों के खातों में दिख रही है। सूत्रों से यह भी पता चला है कि वित्त समिति के पास अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का वेतन बढ़ाने का अधिकार नहीं है। वेतन वृद्धि से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को छोड़कर सभी संसद सदस्यों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे पहले, पंजाब विधानसभा ने सांसदों, प्रांतीय मंत्रियों, स्पीकर, डिप्टी स्पीकर, संसदीय सचिवों और अन्य अधिकारियों के मासिक वेतन में वृद्धि को मंजूरी दी थी।

