रायपुर। राजधानी में एक बड़ा ठगी का मामला सामने आया है, जिसने न केवल आम नागरिकों बल्कि प्रशासनिक महकमे को भी हिला कर रख दिया है। खुद को ACB (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) और EOW (आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा) का वरिष्ठ अधिकारी बताकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाला आरोपी हसन आबिदी आखिरकार पुलिस की गिरफ्त में आ गया है।
टिकरापारा थाना और क्राइम ब्रांच की संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार किया गया आरोपी, रायपुर के संजय नगर का निवासी है। वह बीते पांच वर्षों से खुद को जांच एजेंसी का आला अधिकारी बताकर लोगों को डराता, धमकाता और उनसे मोटी रकम वसूल करता था। हसन सोशल मीडिया पर अपनी रसूखदार छवि बनाने के लिए राजनीतिक नेताओं के साथ खिंचवाई गई तस्वीरें साझा करता था। इसी प्रभाव का फायदा उठाकर वह लोगों को फंसाता और धमकाकर ठगी करता था। वह अक्सर संपत्ति कारोबार से जुड़े लोगों को निशाना बनाता था।
इस ठगी की पोल उस समय खुली जब एक महिला पटवारी के पति राजेश सोनी ने टिकरापारा थाने में शिकायत दर्ज करवाई। उन्होंने बताया कि हसन ने एक साल में किश्तों में एक करोड़ रुपये की वसूली की। आरोपी उन्हें झूठे केस में फंसाने और ACB में शिकायत दर्ज कराने की धमकी देता था। भय के चलते शिकायतकर्ता ने कर्ज लेकर, जमीन गिरवी रखकर और यहां तक कि पत्नी के गहने बेचकर आरोपी को रुपये दिए।
प्रॉपर्टी डीलरों को बनाता था शिकार जांच में सामने आया है कि हसन विशेष रूप से जमीन कारोबारियों को टारगेट करता था। वह कहता कि उनकी जमीन विवादित है और उस पर केस दर्ज होने वाला है। इसके बाद वह मोटी रकम ऐंठता था। कई बार वह खुद को IAS अधिकारी या जांच एजेंसी का निदेशक भी बताता और फर्जी दस्तावेज दिखाता था।
हसन की धमकियों और राजनीतिक नामों के सहारे अधिकतर पीड़ित सामने आने से कतराते रहे। आरोपी का डर इतना था कि लोग किसी भी कानूनी कार्रवाई से बचते रहे। फिलहाल आरोपी से गहन पूछताछ जारी है। पुलिस को आशंका है कि ठगी का शिकार बने लोगों की संख्या काफी अधिक हो सकती है, जिनमें बड़े कारोबारी और सरकारी अफसर भी शामिल हैं। पुलिस ने ऐसे सभी पीड़ितों से आगे आकर शिकायत दर्ज कराने की अपील की है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस मामले को लेकर जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि हसन के साथ इस ठगी में कोई अन्य सहयोगी शामिल था या नहीं। गंभीर संदेश छोड़ गया मामला यह मामला छत्तीसगढ़ में फर्जीवाड़े की एक बड़ी मिसाल बन चुका है। इससे स्पष्ट है कि कैसे कुछ लोग सरकारी एजेंसियों की आड़ लेकर आम नागरिकों को मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित करते हैं। आरोपी की गिरफ्तारी से यह उम्मीद जगी है कि और भी पीड़ित अब आगे आकर न्याय की मांग करेंगे।

