रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी पहचान मिलने जा रही है। 30 जुलाई को बस्तर पंडुम-2026 के विजेता प्रतिभागियों, पारंपरिक जनजातीय नेतृत्व व्यवस्था के प्रतिनिधियों, पद्मश्री सम्मानित विभूतियों और जनप्रतिनिधियों सहित 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से शिष्टाचार भेंट करेगा।
प्रतिनिधिमंडल में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल सहित कई प्रमुख प्रतिनिधि शामिल रहेंगे।
राष्ट्रपति भवन में होगा विशेष सम्मान
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर पंडुम-2026 के विजेता प्रतिभागियों, परगना मांझी, मांझी, चालकी तथा पद्मश्री सम्मानित विभूतियों के सम्मान में विशेष भोज का आयोजन किया है। प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति भवन का भ्रमण करने के साथ नई दिल्ली के प्रमुख राष्ट्रीय स्थलों का भी अवलोकन करेगा। इसे बस्तर की जनजातीय संस्कृति और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को देश के सर्वोच्च संवैधानिक मंच पर मिल रहे सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।
CM साय बोले- पूरे प्रदेश के लिए गर्व का अवसर
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय समाज की गौरवशाली विरासत के संरक्षण, संवर्धन और उसे राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति भवन में बस्तर के कलाकारों और पारंपरिक जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है और यह जनजातीय समाज के सम्मान का प्रतीक है।
बस्तर पंडुम बना राष्ट्रीय पहचान का माध्यम
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि बस्तर पंडुम-2026 ने यह साबित किया है कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति वैश्विक स्तर पर भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाने की क्षमता रखती है। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव जनजातीय ज्ञान परंपरा, लोकजीवन, सांस्कृतिक अस्मिता और पारंपरिक नेतृत्व व्यवस्था के संरक्षण का सशक्त अभियान बन चुका है।
54 हजार से अधिक प्रतिभागियों ने दिखाया सांस्कृतिक वैभव
वर्ष 2026 में आयोजित बस्तर पंडुम में बस्तर संभाग के सात जिलों के 32 विकासखंडों से 54,750 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। 10 जनवरी से 9 फरवरी तक आयोजित इस महोत्सव में जनजातीय नृत्य, लोकगीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, पारंपरिक वेशभूषा, आभूषण, चित्रकला, शिल्प, पारंपरिक व्यंजन, आंचलिक साहित्य और वन-औषधि सहित 12 विधाओं में प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।
राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर मिली पहचान
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में पहली बार आयोजित बस्तर पंडुम को विश्व के सबसे बड़े जनजातीय सांस्कृतिक महोत्सव के रूप में गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में स्थान मिला था। वहीं, वर्ष 2026 के आयोजन का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जगदलपुर में किया था, जबकि समापन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शामिल हुए थे। महोत्सव ने स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों, स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों को नए आर्थिक अवसर भी प्रदान किए।
राष्ट्रपति भवन तक पहुंच रही बस्तर की यह सांस्कृतिक यात्रा छत्तीसगढ़ के जनजातीय गौरव, सांस्कृतिक समृद्धि और भारत की विविध विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।


